हक्कानी नेटवर्क के संस्थापक जलालुद्दीन की मौत, तालिबान के प्रवक्ता ने किया दावा

हक्कानी नेटवर्क के संस्थापक जलालुद्दीन की मौत, तालिबान के प्रवक्ता ने किया दावा

Siddharth Priyadarshi | Publish: Sep, 04 2018 02:01:05 PM (IST) एशिया

तालिबान के प्रवक्ता मुजाहिद ने कहा कि पूर्व तालिबान नेता मुल्ला उमर की मौत के बाद तालिबान को एक साथ रखने में हक्कानी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

वाशिंगटन: तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने हक्कानी नेटवर्क के संस्थापक जलालुद्दीन हक्कानी की मौत की घोषणा की है। जलालुद्दीन हक्कानी लंबे समय से बीमार था। अमरीकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक वह अफगान तालिबान के नेताओं समेत आतंकवादी संगठन क्वेटा शूरा के सदस्य था। तालिबान के प्रवक्ता मुजाहिद ने आगे कहा कि पूर्व तालिबान नेता मुल्ला उमर की मौत के बाद तालिबान को एक साथ रखने में हक्कानी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

दुनिया भर की एजेंसियों के लिए खौफ का पर्याय

एक जमाने में दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियों के लिए खौफ का पर्याय रहे आतंकवादी जलालुद्दीन हक्कानी की मौत के बाद हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है कि जलालुद्दीन की मौत की पुष्टि हो गई है। निगरानी समूह एसआईटीई ने अफगान तालिबान के बयान के हवाले से इस खबर की पुष्टि की।

सोवियत रूस से लड़ने के लिए बनाया हक्कानी नेटवर्क

हक्कानी ने सोवियत रूस से लड़ने के लिए अपना नेटवर्क बनाया था। इसने अफगानिस्तान में 1980 के दशक में सोवियत फौजों से जंग लड़ी थी। 1995 में हक्कानी ने अपने टेरर नेटवर्क को तालिबान के साथ मिला दिया। 2012 में यूएसए ने हक्कानी नेटवर्क को एक आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया।

कौन था जलालुद्दीन हक्कानी

1939 में अफगानिस्तान के पकतिया प्रांत में जन्मे जलालुद्दीन हक्कानी ने दारुल उलूम हक्कानिया से पढ़ाई की थी। बताया जाता है कि दारुल उलूम हक्कानिया को पाकिस्तान केधार्मिक नेता मौलाना समी उल हक के पिता ने शुरू किया था। दारुल उलूम हक्कानिया में ही जलालुद्दीन तालिबान और दूसरे चरमपंथी गुटों के साथ संपर्क में आया। जब अफगानिस्तान पर तालिबान का शासन था तो जलालुद्दीन हक्कानी को कबायली मामलों का मंत्री बनाया गया था। उसे तालिबान नेता मुल्ला उमर के बाद अफगानिस्तान में सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था।

क्या खत्म होगा आतंक का किस्सा

बताया जा रहा है कि जलालुद्दीन हक्कानी की मौत से अफगानिस्तान में शांति लौटने की उम्मीद है। रक्षा मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि बेहद विध्वंसकारी प्रवृत्ति के इस बड़े आतंकी की मौत से अफगान और पाकिस्तान-अफगान सीमा पर कबायली इलाकों में आतंकियों का एक बड़ा समर्थक नहीं रहा है। जलालुद्दीन भले ही लंबे समय से बीमार था, लेकिन वह अपने अनुभवों और क्रिया कलापों से आतंकी नेटवर्क के लिए काफी मददगार बना हुआ था।

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