World Recap: डोकलाम विवाद से बाहर निकल भारत और चीन के रिश्तों में आई नई गरमाहट

इस साल दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच पहली अनौपचारिक शिखर बैठक के बाद से माहौल में आई नरमी

By: Mohit Saxena

Published: 30 Dec 2018, 03:00 PM IST

बीजिंग। भारत और चीन के बीच के संबंध साल 2017 के मुकाबले 2018 में ज्यादा शांतिपूर्ण रहे। जहां 2017 में दोनों के बीच डोकलाम में बड़ा गतिरोध देखने को मिला, वहीं इस साल दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच पहली अनौपचारिक शिखर बैठक हुई और इससे एशिया के दो बड़े देशों के बीच तनाव कम करने में मदद मिली। भारत-चीन के द्विपक्षीय संबंधों में 60 अरब डॉलर वाले चीन-पाक आर्थिक गलियारे (सीपेक) के साथ ही डोकलाम में दोनों देश की सेनाएं 73 दिनों तक आमने सामने डटी रहीं। इससे पहले 2014 में साबरमती आश्रम में जिनपिंग की मोदी से मुलाकात को भी काफी अहम समझा गया। इसके बाद ही डोकालाम से चीन पीछे हटा था।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी परियोजना

सीपीईसी 'बेल्ट ऐंड रोड इनीशिएटिव' (बीआरआई) का एक हिस्सा है,यह राष्ट्रपति शी जिनपिंग की महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसका उद्देश्य विदेश में चीन का प्रभाव बढ़ाना है। सीपेक और डोकलाम को लेकर गतिरोध ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को वुहान में शिखर बैठक में दोनों देशों के संबंधों में शांतिपूर्ण विकास की संभावना का पता लगाने के लिए प्रेरित किया।

मूलभूत हितों के अनुरूप है

चीन के विदेश मंत्रालय ने भारत-चीन संबंधों में इस वर्ष आए बदलावों की समीक्षा करते हुए कहा कि वर्तमान परिवर्तनशाली अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति में चीन-भारत संबंधों का सार्थक विकास दोनों देशों के मूलभूत हितों के अनुरूप है। बीआरआई से चीन से लगे दक्षिण एशियाई पड़ोस में भारत का प्रभाव कम होने का खतरा उत्पन्न हुआ क्योंकि चीन ऋण कूटनीति के आरोपों के बीच छोटे देशों को आधारभूत परियोजनाओं के लिए अरबों डॉलर का ऋण दे रहा है। इस बीच,सीपेक चीन-भारत संबंधों में सबसे बड़े व्यवधान के तौर पर उभरा है।

संबंधों में दरार और बढ़ गई

भारत ने इसको देखते हुए पिछले वर्ष राष्ट्रपति शी की ओर से आयोजित बीआरआई फोरम का बहिष्कार किया। चीन ने इसके साथ ही परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह का सदस्य बनने और जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के भारत के प्रयास में बाधा उत्पन्न की जिससे दोनों देशों के संबंधों में दरार और बढ़ गई। वर्ष 2018 एक ऐसा वर्ष था जिस दौरान भारत और चीन संबंध डोकलाम से वुहान और उसके आगे बढ़े। इस वर्ष दोनों देशों के नेेताओं के बीच सर्वश्रेष्ठ राजनीतिक संवाद देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी इस वर्ष चार बार मिले। जिस पर ध्यान नहीं दिया गया वह यह है कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और चीन के रक्षा मंत्री वेई फंगह ने भी इस वर्ष तीन बार मुलाकात की।

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