संयुक्त राष्ट्र का बयान- रोहिंग्या मुसलमानों की सुरक्षित वापसी थोड़ी मुश्किल

रोहिंग्या शरणार्थियों की समस्या पर यूएन सुरक्षा परिषद की बैठक में विशेष दूत ने कहा है कि इस समस्या को हल होने में कुछ समय लगेगा।

By: Navyavesh Navrahi

Published: 24 Jul 2018, 04:59 PM IST

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक को संबोधित करते हुए म्यांमार के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत क्रिस्टीनी श्रेनर बर्गनर ने कहा कि बांग्लादेश के 9 लाख से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थियों ककी वापसी में थोड़ी मुश्किलें आ रही हैं। इनकी वापसी में अभी कुछ और समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि ये ऐसी समस्या है, जो इतने कम समय में हल नहीं हो सकती। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार- संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की विशेष दूत ने कहा कि अपना कार्यकाल संभालने के बाद से उन्होंने म्यांमार की जटिल परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया है। सारे मामले को समझने के लिए उन्होंने कई लोगों से विस्तृत बातचीत की है।

संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर के अनुसार- 10 लाख से अधिक अल्पसंख्यक रोहिंग्या म्यांमार के उत्तरी राखिने राज्य से अपने घर छोड़कर चले गए थे। क्रिस्टीनी ने कहा कि म्यांमार के दो दौरों के दौरान वे रोहिंग्या शरणार्थी मामले पर म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की के साथ एक शांति सम्मेलन में भी शामिल हुई थीं साथ ही खास तौर पर उन्होंने दक्षिणी बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में शरणार्थी शिविर का दौरा भी किया था।

बता दें, म्यांमार में हिंसा के बाद रोहिंग्या मुसलमानों ने बांग्लादेश में शरण ली थी। किंतु कुछ समय बाद वहां भी उनके हालात अच्छे नहीं रहे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो इस समुदाय के कहीं और जाने के लिए भी जगह नहीं ची है। बता दें, ये लोग- पहाड़ों पर झोपडियां बनाकर रह रहे थे। लेकिन तेज बरसात की वजह से इन लोगों की झोपडियों में पानी आना शुरू हो गया है। साल 2017 में म्यांमार में हुए दंगों से बचकर आई एक महिला के अनुसार- दंगों के समय सेना की कार्रवाई में वे अपने पति को खो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि वहां से भागकर उसने बांगलादेश में शरण ली। लेकिन अब वहां भी हालात बिगड़ने लगे हैं। महिला के मुताबिक- वहां लगातार बारिश हो रही है। इससे पहाड़ों से मिट्‌टी खिसक रही है, जिससे खतरा बना रहता है। हालांकि बांगलादेश सरकार की ओर से इन शरणार्थियों के लिए राहत कैंप लगाए गए हैं।

Navyavesh Navrahi
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