कौन हैं मुजीबुर रहमान, जिनकी जन्म शताब्दी मनाने बांग्लादेश पहुंचे हैं पीएम मोदी?

बांग्लादेश की आजादी के बाद शेख मुजीबुर रहमान देश के पहले राष्ट्रपति बने थे और फिर उसके बाद प्रधानमंत्री का पद भी संभाला। बांग्लादेश के लोग उन्हें प्यार व स्नेह से बंगबंधु कहकर बुलाते थे।

By: Anil Kumar

Updated: 27 Mar 2021, 05:49 PM IST

ढाका। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेश के दो दिवसीय दौरे पर हैं। आज (शनिवार) दौरे का दूसरा दिन है। पीएम मोदी ने शनिवार को कई विशेष कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण विषयों पर अहम समझौते भी हुए। लेकिन पीएम मोदी के बांग्लादेश दौरे का खास मकसद बांग्लादेश के महानायक शेख मुजीबुर रहमान की जन्म शताब्दी समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करना है।

बांग्लादेश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले मुजीबुर रहमान को बांग्लादेश का संस्थापक माना जाता है। यही कारण है कि उन्हें बंगबंधु की उपाधि मिली और बांग्लादेश का राष्ट्रपिता कहा जाता है। आइए जानते हैं कि कौन हैं शेख मुजीबुर रहमान जिनकी जन्म शताब्दी मानने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांग्लादेश दौरे पर गए हैं..

शेख मुजीबुर रहमान कौन थे?

आपको बता दें कि मुजीबुर रहमान का जन्म 17 मार्च 1920 को तत्कालीन भारत (वर्तमान में बांग्लादेश) के गोपालगंज के तंगीपारा गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम शेख लुत्फुर और माता का नाम शेख सायरा खातुन मुजीब था। कुल छह भाई-बहन में से मुजीबुर तीसरे नंबर के थे।

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मुजीबुर रहमान को बांग्लादेश का जनक माना जाता है। जब 1947 में अंग्रेजों से भारत को आजादी मिली तब भारत को तोड़कर पाकिस्तान के रूप में क अलग देश बना। आज के बांग्लादेश को पूर्वी पाकिस्तान के तौर पर जाना गया। लेकिन फिर बांग्लादेश के लोग पाकिस्तान से आजादी की मांग करने लगे और फिर कड़े संघर्ष व भारत की मदद से 1971 में बांग्लादेश आजाद हुआ। यानी कि अब दुनिया में पूर्वी पाकिस्तान को बांग्लादेश के तौर पर पहचान मिली।

पाकिस्तान के खिलाफ आजादी की लड़ाई मुजीबुर रहमान ने शुरू की थी और बांग्लादेश की स्थापना का रास्ता साफ किया था। जब बांग्लादेश आजाद हुआ, तब तीन साल के बाद ही वहां तख्तापलट कर दिया गया और मुजीबुर रहमान के परिवार की निर्मम हत्या कर दी गई।

बांग्लादेश की आजादी के बाद शेख मुजीबुर रहमान देश के पहले राष्ट्रपति बने थे और फिर उसके बाद प्रधानमंत्री का पद भी संभाला। बांग्लादेश के लोगों ने उनकी देशभक्ति को देखते हुए बंगबंधु की उपाधि दी थी। लोग उन्हें प्यार व स्नेह से बंगबंधु कहकर बुलाते थे।

15 अगस्त 1975 को मुजीबुर रहमान की हुई थी हत्या

आपको बता दें कि बांग्लादेश सेना के कुछ जूनियर अधिकारियों ने 15 अगस्त 1975 को राष्ट्रपति भवन पर टैंक से हमला कर दिया। इस हमले में शेख मुजीबुर रहमान समेत पूरा परिवार मारा गया। हालांकि, शेख मुजीबुर की दो बेटियां शेख हसीना और शेख रेहाना की जान बच गईं, क्योंकि वे दोनों जर्मनी घुमने गईं थीं।

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मुजीबुर रहमान की मौत के बाद बांग्लादेश में हिंसा का दौर शुरू हो गया। करीब दो सालों तक यह सिलसिला चलता रहा। इसके बाद अपने पिता राजनैतिक विरासत को हासिल कर आगे बढ़ाने के लिए बेटी शेख हसीना ने राजनीतिक लड़ाई शुरू की और अंततः 1996 में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बनीं।

माना जाता है कि मुजीबुर रहमान की हत्या उनके कुछ फैसलों को लेकर सेना ने की थी। दरअसल, भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और मुजीबुर रहमान अच्छे दोस्त थे। इंदिरा गांधी की तरह मुजीबुर रहमान ने भी बांग्लादेश में राष्ट्रीयकरण पर जोर दिया। ऐसे में उनके खिलाफ लोगों का गुस्सा बढ़ने लगा, जिसमें सेना के अधिकारी भी शामिल थे। इसके अलावा मुजीबुर रहमान पर भाई-भतीजावाद का आरोप भी लगने लगा। जिसके बाद सेना ने राष्ट्रपति भवन पर हमला करते हुए उनकी हत्या कर दी।

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