Chaitra Navratri 2021 : आदिशक्ति की भक्ति में ऐसे रखें वास्तु नियमों का ध्यान

Chaitra Navratri 2021: ऐसी मान्यता है कि जौ उगने की गुणवत्ता से भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।

नवरात्र पूजा में जौ को बेहद शुभ माना गया है। यह समृद्धि,शांति,उन्नति और खुशहाली का प्रतीक होते हैं। ऐसी मान्यता है कि जौ उगने की गुणवत्ता से भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि अगर जौ तेजी से बढ़ते हैं तो घर में सुख-समृद्धि आती है।

चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि आरंभ हो जाती है। नवरात्र स्थापना से लेकर रामनवमी तक का समय अत्यंत पवित्रता,उल्लास और उमंग के साथ मनाया जाता है। आदिशक्ति की उपासना के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा भक्ति भाव से की जाती है। देवी मां सभी को अपना ममतामयी आशीर्वाद देती हैं। नवरात्र पूजा के इन पावन दिनों में यदि श्रद्धा भक्ति के साथ-वास्तु नियमों का ध्यान रखकर उपासना की जाए तो इससे पूजा में ध्यान भी लगता है और पूजा के फल में वृद्धि होती है।

सही दिशा में हो पूजन-
उत्तर-पूर्व पूजा करने के लिए आदर्श स्थान हैं। यहां पूजा करने से अच्छा प्रभाव होता है व शुभ फलों में वृद्धि भी। प्रभु का मार्गदर्शन मिलता है।

साात्विक रंग-
ध्यान रहे कि जिस कमरे में आप माता का पूजन कर रहे है वह कक्ष साफ-सुथरा हो,उसकी दीवारें हल्के पीले, गुलाबी ,हरे या बैंगनी जैसे सात्विक रंग का हो तो अच्छा है। ये रंग आध्यात्मिक ऊर्जा के स्तर को बढ़ाते हैं। काले,नीले और भूरे जैसे तामसिक रंगों का प्रयोग पूजा कक्ष की दीवारों पर नहीं होना चाहिए। ये रंग सुस्ती और आलस्य को बढ़ाते हैं।

इस दिशा में रखें कलश-
धर्मशास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश में सभी ग्रह,नक्षत्रों और तीर्थों का वास होता है। इनके आलावा ब्रह्मा,विष्णु,रूद्र,सभी नदियों,सागरों,सरोवरों और तैतीस कोटि देवी-देवता कलश में विराजमान होते हैं। वास्तु के अनुसार ईशान कोण(उत्तर-पूर्व) जल और ईश्वर का स्थान माना गया है। यहां सर्वाधिक सकारात्मक ऊर्जा रहती है। पूजा करते समय माता की प्रतिमा या कलश की स्थापना इसी दिशा में करना श्रेष्ठ रहेगा।

शुभ रहेगी दिशा-
देवी मां का क्षेत्र दक्षिण और दक्षिण पूर्व दिशा माना गया है इसलिए यह ध्यान रहे कि पूजा करते समय आराधक का मुख दक्षिण या पूर्व में ही रहे। शक्ति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाने वाली पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से हमारी प्रज्ञा जागृत होती है।

बंदनवार का महत्त्व-
पूजा-अनुष्ठान के दौरान घर के प्रवेश द्वार पर आम या अशोक के ताजेे पत्तों की बंदनवार लगाईं जाती है। मान्यता यह है कि इससे घर में बुरी शक्तियां प्रवेश नहीं करतीं। घर में शुभ के लिए घी का दीया जलाएं।
अनीता जैन,वास्तुविद

विकास गुप्ता
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