तुलसी विवाह से मिलेंगे बेहद शुभ फल, लेकिन कुंवारे लड़के-लड़कियां नहीं कर सकते इसकी पूजा

--कार्तिक मास में ही धनतेरस (Dhanteras), दिवाली (Diwali), छठ (Chhath) और तुलसी विवाह (Tulsi Vivah) जैसे पवित्र पर्व मनाए जाते हैं

By: Pratibha Tripathi

Updated: 20 Nov 2020, 02:51 PM IST

नई दिल्ली। कार्तिक मास में शुरू होने वाले हर त्यौहार का अपना एक अलग महत्व है।फिर चाहे बात धनतेरस (Dhanteras), दिवाली (Diwali), छठ (Chhath) की ही क्यो ना हों, इन सभी का बीच तुलसी विवाह (Tulsi Vivah) पर्व का भी विशेष महत्व है। इस दिन देवताओं के उठने का समय शुरू हो जाता है। और इसी दिन तुलसी माता की शादी की जाती है। मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में जो भी लोग नियमानुसार तुलसी की उपासना करते हैं, उन पर भगवान विष्णु की कृपा-दृष्टि हमेशा बनी रहती है.

कहा तो यह भी जाता है कि इस पवित्र मास में भगवान श्री हरि नींद से जागते है। और उन्हें खुश करने के लिए यदि तुलसी की पत्ती चढ़ा दी जाए तो कई गुना फल प्राप्त हो जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में एकादशी के दिन तुलसी जी का विवाह शालिग्राम के साथ धूमधाम से किया जाएगा। इस दिन जो लोग उनकी पूजा पूरे नियमानुसार करते है उन्हें कई गुना फल प्राप्त होता है। तुलसी विवाह को काफी शुभ माना गया है।

लेकिन इनकी पूजा के दौरान एक नियम यह भी है कि कुंवारे लड़के-लड़कियां तुलसी माता का विवाह नहीं करवा सकते। जी हां, जिस तरह से शादीशुदा लोगों को किसी यज्ञ या पूजा या फिर कन्यादान में बैठने से इसका फल पूरा मिलता है उतना कुवारें लड़के लड़कियों को नही मिल सकता है। इसलिए तुलसी पूजा के समय कुवारें लोगों को पूजा नही कराना चाहिए। हां यदि कुवारें लड़के-लड़कियां तुलसी की पूजा में रखें गए वस्त्र को अपने पास रखते है तो उन्हें इसका फल तुंरत ही मिलने लगता है।

इस साल 26 नवंबर के दिन एकादशी ग्यारस पड़ रही है। देवउठनी के बाद से देशभर में मंगल कार्यों की शुरुआत हो जाएगी।

तुलसी जी को मिला भगवान विष्णु का वरदान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, घर में तुलसी का होना बेहद शुभ माना गया है। कहा जाता है कि जिस घर में तुलसी का वास होता है, वउस घर में कभी नाकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नही करती है। घर में सुख शातिं बनी रहती है। तुलसी का विवाह भगवान विष्णु के दूसरे रूप शालिग्राम (Shaligram) के साथ किया जाता है। कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने एक बार प्रसन्न होकर तुलसी को वरदान दिया था कि मुझे शालिग्राम के नाम से भी जाना जाएगा और जो भी उनका विवाह तुलसी के साथ कराएगा, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।

तुलसी विवाह के समय भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व है। शालिग्राम और तुलसी का विवाह कराने से व्यक्ति को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।

इस तरह करें तुलसी पूजा
शास्त्रों के अनुसार, तुलसी मां के चारों तरफ स्तंभ बनाने चाहिए। इन स्तंभों को तोरण से सजाना चाहिए। और चारों ओर स्वास्तिक का शुभ चिन्ह भी बनाना चाहिए। इसके बाद घर के आंगन से लेकर हर कोनों पर रंगोली बनाएं और कमल के साथ ही शंख चक्र व गाय के पैर का चिन्ह बनाकर पूजा करनी चाहिए। उसके बाद तुलसी मां को लाल चुनरी चढ़ाकर ,धूप, दीप, रोली, सिंदूर, चंदन फल फूल अर्पित करें। फिर तुलसी मां के चारों तरफ दीप और धूप जलाएं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें।

Pratibha Tripathi
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