Chhath Puja 2020: इस गांव में नदी में नहीं बल्कि कुएं में होती है छठ की पूजा, द्रौपदी ने की थी इसकी शुरुआत

इस बार छठ पर्व(Chhath Puja 2020) 18 नवंबर से 21 नंवबर तक मनाया जाएगा

नगड़ी गांव में छठ की पूजा महिलाएं नदी या तालाब की बजाय एक कुएं में करती हैं

By: Pratibha Tripathi

Published: 18 Nov 2020, 12:25 PM IST

नई दिल्ली। 18 नवंबर से पूरे भारत में महापर्व छठ (Chhath Puja 2020) पूजा की शुरुआत होने वाली है। बिहार में इस पर्व का विशेष महत्व है। अब इस पर्व को देश के कई अलग-अलग हिस्सों में मनाया जाने लगा है। लेकिन झारखंड के एक गांव में छठ पर्व को मनाने का तरीका सबसे अलग है। रांची के नगड़ी गांव में इस पर्व को मनाने के लिए महिलाएं नदी या तालाब में जाने की बजाय, एक कुएं में जाकर छठ की पूजा करती हैं। आइए जानते हैं इससे जुड़ी मान्यता के बारे में..

कहा जाता है कि कुंए में जाकर छठ पूजा करने की शुरुआत द्रौपदी ने की थी क्योंकि वे वनवास के दौरान सूर्योपासना करने के लिए कुएं के पास खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया करती थीं। ऐसा माना जाता है कि पांडव ने काफी लंबे समय तक झारखंड के इसी इलाके में ठहरकर अपना वनवास काटा था। और इसी जंगल में पांडवों नें अपनी प्यास बुझाने के लिए जमीन में तीर मारकर पानी निकाला था।

मान्यता यह भी है कि इसी जल से द्रौपदी सूर्य को अर्घ्य दिया करती थीं। सूर्य की पूजा करने से पांडवों पर सूर्य भगवान का आशीर्वाद हमेशा बना रहा। तब से लेकर आज तक इसी जगह पर महिलाएं आकर छठ का महापर्व बड़ी धूम-धाम से मनाती हैं।

छठ महापर्व पूरे चार दिनों तक चलता है। इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होती है, और सप्तमी की अरुण वेला पर इस व्रत की समाप्ति हो जाती है। इस व्रत को रखते समय साफ सफाई का विशेष ध्यान दिया जाता है। इस पर्व में महिलाएं दिन भर उपवास रखकर शाम को खीर का सेवन करती हैं । खीर में शक्कर की जगह गन्ने के रस का उपयोग किया जाता है।

तीसरे दिन भी उपवास रखकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य दूध और जल से दिया जाता है। चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अंतिम अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद कच्चे दूध और प्रसाद को खाकर व्रत का समापन किया जाता है।

Pratibha Tripathi
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