परंपरा: दिवाली पूजा में देवी लक्ष्मी को क्यों लगाते हैं इन चीजों का भोग, क्या है इसके पीछे की खास वजह!

  • दीपावली से जुड़ी कई परंपराएं हैं
  • हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा पर्व दीपावली, कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है

By: Pratibha Tripathi

Updated: 13 Nov 2020, 03:14 PM IST

नई दिल्ली। हमारे देश में सदियों से दिवाली का पर्व मनाया जाता रहा है, दिवाली के अवसर पर लोग देवी लक्ष्मी की पूजा आराधना करते हैं। इस अवसर पर माता लक्ष्मी को तरह तरह के प्रसाद चढ़ाए जाते हैं, लेकिन माता लक्ष्मी को खील-बताशे का प्रसाद चढ़ाना शुभ माना जाता है। दिवाली पर इस परंपरा को निभाने के पीछे धार्मिक, दार्शनिक और दूसरे कई कारण हैं, जो इस प्रकार हैं...

माता लक्ष्मी को क्यों चढ़ाते हैं खील-बताशे

- दिवाली पर धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए बड़ी श्रद्धा भाव से लोग पूजा करते हैं। ऐसी मान्यता है इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और जीवनभर धन-संपत्ति से सम्पन्नता रहती हैं।

- खील-बताशे का प्रसाद चढ़ाने के पीछे कोई एक कारण नहीं है, इसका कई तरह से महत्व है। ऐसी मान्यता के पीछे व्यवहारिक, दार्शनिक, और ज्योतिषीय कारक होते हैं। यहां भी ये सभी कारण माने गए हैं दीपावली पर खील-बताशे का प्रसाद चढ़ाने के पीछे।

- खील मतलब धान को भूंज कर बनाई गई लाई। यह चावल से बनती है और भारत के बड़े भाग में इसे प्रमुख अन्न माना गया है।

- धान की फसल दीपावली से ठीक पहले तैयार होती है, एक यह भी कारण है लक्ष्मी जी को खील-बताशे का प्रसाद चढ़ाने का। मान्यता है कि नई फसल देवी लक्ष्मी को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है।

- खील-बताशों का ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व है। दीपावली पर लोग धन और वैभव की प्राप्ति के लिए पूजा आराधना करते हैं। जबिक धन-वैभव के दाता शुक्र ग्रह को माना गया है।

- और शुक्र ग्रह का प्रमुख कारक धान होता है। धन वैभव की प्राप्ति के लिए शुक्र को प्रसन्न करना अनिवार्य माना गया है। यही कारण है धन की देवी माता लक्ष्मी को खील-बताशे का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

Pratibha Tripathi
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned