शनिवार को करें ये खास उपाय, शनि प्रकोपों से मिल जायेगी मुक्ति, हर ख्वाहिश होगी पूरी

शनिवार के दिन लोहे के बर्तन में सरसों का तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें ।
बाद में तेल से भरे बर्तन सहित पात्र किसी जरुरतमंद को दान कर दें।

By: Shaitan Prajapat

Published: 09 Jan 2021, 09:45 AM IST

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव को ज्योतिष में न्यायाधीश का पद दिया गया है। मनुष्य के हर अच्छे और .बुरे कार्य का फल शनिदेव ही देते हैं। इंसान जैसे कर्म होते हैं, उसे वैसा ही भाग्य भोगना पड़ता है। शनिदेव का चरित्र भी असल में, कर्म और सत्य को जीवन में अपनाने की ही प्रेरणा देता है। शनि को भले ही दुखदायी माना जाता है परन्तु सत्य तो यह है कि ये केवल आपको परेशान ही नहीं करते बल्कि आप पर आशीर्वाद भी देते है। यदि शनिदेव को प्रसन्न कर लिया जाए तो व्यक्ति के समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं और उसका अच्छा समय शुरु हो जाता है। आज आपको बताएंगे कि शनिदेव को कैसे प्रसन्न करे।

- ज्योतिषशास्त्र के अनुसार शनिवार के दिन उपाय करने से शनि दोषों से मुक्ति मिलती है। शनिवार के दिन शनि महाराज के मंत्र का 108 बार जप करें। मंत्र. ओम प्रां प्रीं पौं सः शनैश्चराय नमः का जप करें। शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

- शनिवार के दिन लोहे के बर्तन में सरसों का तेल भरकर उसमें अपना चेहरा देखें और बाद में तेल से भरे बर्तन सहित पात्र किसी जरुरतमंद को दान कर दें। ऐसा करने से शनिदेव प्रसन्न होंगे और शुभ परिणाम प्राप्त होंगे।

यह भी पढ़े :— 2,200 मीटर ऊंचाई पर बना है ये मंदिर, श्रद्धालु चढ़ते है 8000 सीड़ियां

- हर शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करें। क्योंकि शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और शनिदेव के प्रकोपों से मुक्ति दिलाते हैं।

- ऐसा कहा जाता है कि शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए आपको उगते सूरज के समय लगातार 43 दिनों तक शनिदेव की मूर्ति पर तेल चढ़ाना चाहिए। यह ध्यान में रखें कि शनि देव को प्रसन्न करने की यह विधि शनिवार के दिन ही आरंभ करनी चाहिए।

- शनि की कृपा पाने के लिए हर दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें और इस पाठ से मंगल और शनि दोनों अनुकूल रहेंगे।

शनिदेव की पूजन विधि .....
हर शनिवार को मन लगाकर शनिदेव की पूजा करने से आप उनका आशीर्वाद ग्रहण कर सकते हैं। सूर्य के उदय होने के पूर्व स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पीपल के वृक्ष की जड़ में शुद्ध जल अर्पित करें। पीपल के वृक्ष के सामने सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। सर्वप्रथम शिवजी तथा कृष्ण जी की आराधना करना शुभ माना जाता है क्योंकि शनिदेव को भी ये बहुत प्रिय हैं। अब शनि के इन दस नामों का उच्चारण करें। कोणस्थ, कृष्ण, पिप्पला, सौरि, यम, पिंगलो, रोद्रोतको, बभ्रु, मंद और शनैश्चर।

Show More
Shaitan Prajapat
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned