इस गांव में आने से गरीबी होती है दूर, महाभारत काल से जुड़ा है इसका संबंध

भारत का एकमात्र ऐसा गांव है, जो धरती पर मौजूद चारों धामों में भी सबसे पवित्र माना जाता है। इस गांव को शापमुक्त और पापमुक्त भी माना जाता है।

By: Pratibha Tripathi

Published: 19 Jan 2021, 09:29 PM IST

नई दिल्ली। भारत में कई जगह ऐसी है जो रहस्यों से भरी पड़ी है। जिनके पीछे ऐसी रहस्यमई बाते छिपी हुई है जिसके बारे में शायद बहुत ही कम लोग जानते होगें। इन्ही में से एक है उत्तराखंड में बसा 'भारत का आखिरी गांव' या 'उत्तराखंड का आखिरी गांव' कहा जाता है।

यह गांव चीन की सीमा से लगा हुआ है। जिसका संबंध महाभारत काल से भी जुड़ा हुआ है और भगवान गणेश से भी। आज हम बता रहे है इस गांव की कई रहस्यमय और रोचक बातें, जो आपको हैरान कर देंगी। माणा नामक यह गांव सबसे पवित्र माना जाता है। यह करीब 19 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। लेकिन यह गांव शापमुक्त और पापमुक्त माना जाता है।

इस गांव के बारे में यह भी कहा जाता है कि जो लोग गांव पर आते है तो यहां आने से उनके भाग्य खुल जाते है। उनकी गरीबी दूर हो जाती है। कहते हैं कि इस गांव को भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद मिला हुआ है कि जो भी यहां आएगा, उसकी गरीबी दूर हो जाएगी। ये एक बड़ी वजह है कि यहां हर साल बड़ी संख्या में लोग इस गांव में अपने पाप को धोने के लिये आते है।

माणा में महाभारत काल का बना हुआ एक पुल भी है, जिसे 'भीम पुल' के नाम से जाना जाता है। लोगों का मानना है कि जब पांडव इस गांव से होते हुए स्वर्ग की ओर जा रहे थे, तो उन्होंने यहां मौजूद सरस्वती नदी से आगे जाने का रास्ता मांगा था, लेकिन सरस्वती नदी ने मार्ग देने से मना कर दिया, जिसके बाद महाबली भीम ने दो बड़ी-बड़ी चट्टानों को उठाकर नदी के ऊपर रख दिया था और अपने लिए रास्ता बनाया था। इसके बाद इस पुल को पार करके पांडवों ने स्वर्ग के लिए प्रस्थान किया था।

इसके अलावा इस गांव के बारे में यह भी कहा जाता है जब महर्षि वेदव्यास के कहने पर भगवान गणेश 'महाभारत' लिख रहे थे तो सरस्वती नदी का तेज प्रवाह कल कल की तेज ध्वनि के साथ बह रहा था। जिससे भगवान गणेंश के काम में बाधा उत्पन्न हो रही थी। तब गणेश जी ने देवी सरस्वती से उनके पानी का शोर कम करने को कहा। लेकिन सरस्वती नदी का शोर कम नहीं हुआ, तो भगवान गणेश ने गुस्से में उन्हें शाप दे दिया कि आज के बाद इससे आगे तुम किसी को नहीं दिखोगी। तब से यह गांव शापमुक्त हो गया।

Pratibha Tripathi
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