रहस्यमई मंदिर! यहां होती है मां की योनि की पूजा, प्रसाद में देते है खून की रुई

अपने देश कई ऐसे मंदिर सदियों से बने हुए है। कुछ मंदिरों का रहस्य आज भी बरकरार है। यह मंदिर दुनियाभर में काफी मशहूर है। इन मंदिरों को लेकर लोगों में मन में गहरी आस्था है। आज आपको एक ऐसे ही रहस्यमई मंदिर में बारे में बताने जा रहे है जहां से खून की नदी निकलती है।

By: Shaitan Prajapat

Updated: 30 Oct 2020, 02:35 PM IST

अपने देश कई ऐसे मंदिर सदियों से बने हुए है। कुछ मंदिरों का रहस्य आज भी बरकरार है। यह मंदिर दुनियाभर में काफी मशहूर है। इन मंदिरों को लेकर लोगों में मन में गहरी आस्था है। आज आपको एक ऐसे ही रहस्यमई मंदिर में बारे में बताने जा रहे है जहां से खून की नदी निकलती है। आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कौन सा मंदिर है जो खून की नदी के पास बना हुआ है। अब बात कर रहे है असम के कामाख्या मंदिर की। कामाख्या मंदिर दुनियाभर में अपनी मान्यताओं के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां मां की योनि के दर्शन करने के लिए कई भक्त विदेश से भी आते हैं।


हर किसी कामना सिद्ध होती है
कामाख्या मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि इस अति प्राचीन मंदिर में देवी सती या मां दुर्गा की एक भी मूर्ति नहीं है पौराणिक आख्यानों के अनुसार इस जगह देवी सती के शरीर का कुछ अंश गिरा था जो समय के साथ महान शक्ति-साधना का केंद्र बना कहते हैं यहां हर किसी कामना सिद्ध होती है यही कारण इस मंदिर को कामाख्या कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि कामाख्या देवी की योनि के दर्शन करने से तमाम इच्छाएं पूरी होती है।


प्रतिवर्ष मासिक धर्म के चक्र
कमाख्या देवी के मंदिर की एक अनोखी परंपरा सालों चली आ रही है। मासिक घर्म के दिनों में कामाख्या देवी को 3 दिन का आराम दिया जाता है। कामाख्या देवी को 'बहते रक्त की देवी' भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि ये देवी का एकमात्र ऐसा स्वरूप है जो नियमानुसार प्रतिवर्ष मासिक धर्म के चक्र में आता है। इस मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि यहां हर साल जून के महीने में कामाख्या देवी पीरियड्स होती हैं और उनकी योनि से रक्त निकलता है और साथ ही उनके बहते रक्त से ब्रह्मपुत्र नदी का रंग लाल हो जाता है।

 

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kamakhya temple assam

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प्रसाद में देते है खून की रूई
कामाख्या मंदिर हर साल जून में मासिक धर्म के समय तीन दिनों के लिए बंद कर दिया जाता है लेकिन इस दौरान मंदिर के आसपास 'अम्बूवाची पर्व' मनाया जाता है। इस पर्व में सैलानियों के साथ-साथ तांत्रिक साधु और पुजारी भी मेले में शामिल होने के लिए आते हैं। इस दौरान शक्ति प्राप्त करने के लिए साधु और पुजारी पर्वत की अलग-अलग गुफाओं में बैठकर साधना करते हैं। इस मंदिर में मां के दर्शन करने आए लोग मां के मासिक धर्म के खून से लिपटी हुई रूई को पाने के लिए घंटों लाइन में लगते हैं।

तंत्र विद्या और काली शक्तियों
यह मंदिर तीन हिस्सों में बना है. इसका पहला हिस्सा सबसे बड़ा है, जहां पर हर शख्स को जाने नहीं दिया जाता है। दूसरे हिस्से में माता के दर्शन होते हैं, जहां एक पत्थर से हर समय पानी निकलता है कहते हैं। ऐसा क्यों और कैसे होता है, यह आजतक किसी को ज्ञात नहीं है? कई लोग ऐसा सोचते है कि तंत्र विद्या और काली शक्तियों का समय गुजर चुका है लेकिन कामाख्या में आज भी यह जीवन शैली का हिस्सा है। मंदिर के आसपास रहने वाले अघोड़ी और साधू के बारे में कहा जाता है कि वे काला जादू और श्राप से छुटकारा दिलाने में समर्थ होते हैं।

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