आपकी कुंडली में छिपा जिदंगी और मौत का राज

आपकी कुंडली में छिपा  जिदंगी और मौत का राज

Shyam Kishor | Updated: 27 Apr 2018, 03:24:16 PM (IST) धर्म/ज्योतिष

जिनकी उम्र होती है लंबी, उनकी कुंडली में होते हैं ये योग

आपकी कुंडली में छिपा राज जिदंगी और मौत का..


हर किसी के मन में चाहे स्त्री हो या पुरुष यह जानने की प्रबल इच्छा होती की उसकी आयु कितने वर्ष की है एवं कब व कैसे होगी मृत्यु, और इसके लिए लिए वह अनेक ज्योतिष के विद्वानों को अपनी कुंडली दिखा कर समाधान पाने का हर संभव प्रयास भी करते है. लेकिन ईश्वर ने सबके अच्छे बूरे कर्मों के अनुसार जीवन की सांसे जन्म से पूर्व ही निर्धारित कर रखी है, बावजूद इसके फिर भी मनुष्य का जब जन्म हुआ उस समय ग्रह नक्षत्रों की स्थिति क्या थी, उसके आधार पर कुंडली बनाकर भविष्य में होने वाली घटनाओं, व जीवन और मरण का कुछ हद तक पता लगाया जा सकता है।
आज के समय में ज्योतिषियों की भरमार लेकिन हमारे पूर्वज ऋषि-महर्षियों ने बहुत पहले ही ज्योतिष गणना के आधार पर जीवन और मृत्यु के बारे में ग्रहों के कुछ योग बताएं है जिसके आधार जाना जा सकता है कि जातक की कितने वर्ष जियेगा या मृत्यु कैसे, किस प्रकार, और कब होगी।

 

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ऐसे योग जिनसे लंबी आयु का पता लगता है

1- यदि किसी जातक की कुंडली के लग्न अथवा प्रथम भाव में शुक्र स्थित है और प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दशम भाव में गुरु हो तथा अष्टम भाव में कोई पाप ग्रह नहीं है तो उसकी आयु 120 वर्ष होती है।

2- किसी व्यक्ति की कुंडली में अष्टम यानी आठवें भाव या लग्न (प्रथम) भाव में कोई पाप ग्रह न हो और अन्य ग्रहों की स्थिति भी अच्छी हो तो वह व्यक्ति कम से कम 108 वर्ष का जीवन जीता है। अर्थात यदि किसी की कुंडली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दशम भाव में गुरु हो तो वह व्यक्ति की 108 वर्ष की आयु होगी और उम्र भर स्वस्थ भी रहता हैं।

3- यदि किसी जातक की कर्क लग्न की कुंडली बनती हैं और उसके प्रथम भाव में गुरु एवं शुक्र हो और अष्टम भाव में कोई पाप ग्रह नहीं है तो वह व्यक्ति 100 से अधिक शतायु जीवन जीता है। साथ ही यदि कर्क लग्न की कुंडली के प्रथम भाव में चंद्र और गुरु स्थित हो और अष्टम भाव में कोई पाप ग्रह नहीं है तो भी उस व्यक्ति की आयु 100 वर्ष से अधिक होती है।

मृत्यु का रहस्य
जन्म कुंडली में लग्न चक्र और नवांश को देखकर यह बताया जा सकता है की मृत्यु कैसे होगी।

 

1- जन्म के समय के आकाशीय ग्रह योग मानव के जन्म-मृत्यु का निर्धारण करते हैं। चंद्र की कलाओं में अस्थिरता के कारण ज्यादातर आत्महत्यों की घटनाएं अक्सर एकादशी, अमावस्या तथा पूर्णिमा तिथियों में या इनके आस-पास होती है, यदि बुध और शुक्र अष्टम भाव में हो तो जातक की मृत्यु नींद में होती है। अगर लग्नेश का नवांश मेष हो तो जातक की पितृदोष, पीलिया, गंभीर ज्वर, जठराग्नि आदि से संबंधित बीमारियों से मृत्यु होती है।

2- आत्महत्या या हत्या के कारणः- यदि मकर या कुंभ राशिस्थ चंद्र दो पापग्रहों के मध्य हो तो जातक की मृत्यु फांसी, आत्महत्या या अग्नि से होती है और चतुर्थ भाव में सूर्य एवं मंगल तथा दशम भाव में शनि हो तो जातक की मृत्यु फांसी से होती है। यदि अष्टम भाव में एक या अधिक अशुभ ग्रह हों तो जातक की मृत्यु हत्या, आत्महत्या, गंभीर बीमारी या दुर्घटना के कारण होती है।

3- दुर्घटना के कारण मृत्यु योग:- जिस जातक के जन्म लग्न से चतुर्थ और दषम भाव में से किसी एक में सूर्य और दूसरे में मंगल हो उसकी मृत्यु पत्थर से चोट लगने के कारण होती है।, यदि शनि, चंद्र और मंगल क्रमशः चतुर्थ, सप्तम और दशम भाव में है तो जातक की मृत्यु कुएं में गिरने से होती है, और यदि सूर्य और चंद्र दोनों कन्या राशि में हों और पाप ग्रह से दृष्ट हों तो जातक की उसके घर में परिवार के सदस्यों के सामने मृत्यु होती है। यदि चंद्र मेष या वृश्चिक राशि में दो पाप ग्रहों के मध्य स्थित हो तो जातक की मृत्यु शस्त्र या अग्नि दुर्घटना से होती है। यदि चंद्र या गुरु जल राशि (कर्क, वृश्चिक या मीन) में अष्टम भाव में स्थित हो और साथ में राहु हो तथा उसे पाप ग्रह देखता हो तो सर्पदंश से मृत्यु होती है। अष्टमेश पर मंगल का प्रभाव हो, तो जातक गोली से और शनि की दृष्टि अष्टमेश पर हो और लग्नेश भी वहीं हो तो ट्रेन, गाड़ी, जीप, मोटर आदि वाहन दुर्घटना से मौत होती है।

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- अगर किसी जातक का मृत्यु योग बन रहा हो तो नियमित 108 बार संपुटयुक्त महा मृत्‍युंजय मंत्र का रुद्राक्ष की माला से जप करने पर जीवनदान मिलता हैं।

संपुटयुक्त महा मृत्‍युंजय मंत्रः-
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!

- अगर किसी अपने के लिए दुसरे के लिए जप करना हो तो उसका नाम लेकर लघु मृत्‍युंजय मंत्र ।। ॐ जूं स माम् पालय पालय स: जूं ॐ।। इस मंत्र का 108 बार रुद्राक्ष की माला से जप करने पर जीवनदान मिलता हैं।

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