अस्पताल में ताश खेलते हैं डॉक्टर, चपरासी करता है मरीजों का इलाज! देखें वीडियो

औरैया जिले का अछल्दा नेविलगंज आयुर्वेदिक अस्पताल एक फॉर्मेसिस्ट के सहारे ही चल रहा है

By: Hariom Dwivedi

Published: 24 May 2018, 05:01 PM IST

औरैया. उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पताल अपने ही ढर्रे पर चलते हैं, फिर चाहे वो आयुर्वेद चिकित्सा के अस्पताल क्यों न हों। औरैया जिले का अछल्दा नेविलगंज आयुर्वेदिक अस्पताल एक फॉर्मेसिस्ट के सहारे ही चल रहा है। सुबह आठ बजे आने का समय फिक्स है, लेकिन वे कभी-कभी कभार ही आते हैं। यह आयुर्वेदिक अस्पताल फार्मासिस्ट और चपरासी के भरोसे ही चलता है। फार्मासिस्ट अधिकतर समय ओपीडी के बजाय जुआं खेलने में ही मशगूल रहता है। इस बीच चपरासी ही मरीजों को चूरन आदि देकर चलता करता है।

अस्पताल आये मरीजों का कहना है कि यहां जब कभी प्रभारी/ फार्मासिस्ट आते हैं वो बस कार्यालय खोलने के बाद पड़ोसियों के साथ आकर लकड़ी खेलने में व्यस्त हो जाता है। बता दें कि लकड़ी का खेल जुएं की श्रेणी में आता है, जिसमें ताश के पत्तों के साथ पैसे लगाये जाते हैं। अस्पताल में भटक रहे मरीज से पूछा तो उसने बताया कि फॉर्मेशिस्ट ही डॉक्टर हैं। जो ऑफिस के बाहर ताश के पत्ते खेल रहे हैं। ओपीड़ी में डॉक्टर (फार्मासिस्ट) हैं, अक्सर वही दवा आदि देते हैं।

फार्मासिस्ट के जिम्मे आयुर्वेदिक अस्पताल, लेकिन लकड़ी खेलने का गंभीर आरोप
अछल्दा के नेविलगंज में आयुर्वेदिक अस्पताल में मरीजों को देखने का समय सुबह 8 बजे से 2 बजे तक का है। अस्पताल का स्टाफ कभी टाइम पर तो आता नहीं हैं। लेकिन अगर आता भी है तो वह लकड़ी खेलने में मशगूल रहता है। अक्सर वहां पड़ी खाली कुर्सी देखकर मरीज बैरंग वापस लौट जाते हैं। मरीजों की मानें तो वो फॉर्मेशिस्ट को ही डॉक्टर की संज्ञा दे रखे हैं। फॉर्मेशिस्ट चंद्र प्रकाश जो ऐसे ही काम करते हैं। आयुर्वेद अस्पतालों की देखरेख इटावा जनपद से होती है। उक्त के सम्बन्ध में जिला आयुर्वेदिक एवम यूनानी चिकित्साधिकारी डॉक्टर निहारिका सिंह से फ़ोन से कई बार सम्पर्क करने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं हो सकी।

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