इस शिक्षक ने बदल दी सरकारी स्कूल की तस्वीर, 18 से 180 तक पहुंचा दी बच्चों की संख्या

Hariom Dwivedi

Publish: Sep, 05 2018 05:27:39 PM (IST) | Updated: Sep, 05 2018 05:29:36 PM (IST)

Auraiya, Uttar Pradesh, India


औरैया. शिक्षा है अनमोल रतन, पढ़ने का अब करो जतन। शिक्षक की ये लाइनें बच्चे के भविष्य को बदल सकती हैं। ऐसा ही एक है जो बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करता है और स्कूल की दशा और दिशा को बदलने में लगातार प्रयास प्रयास कर रहा है। हम बात कर रहे हैं बिधूना ब्लॉक के अंग्रेजी माध्यमिक विद्यालय रुरुगंज प्रथम में तैनात प्रधानाध्यापक मो. आरिफ सिद्दीकी की। जिन्होंने अपनी मेहनत व लगन से विद्यालय का नाम जनपद के सर्वश्रेष्ठ विद्यालयों में दर्ज कराया। अब अंग्रेजी माध्यम विद्यालय बनने से कांवेंट के बच्चे भी विद्यालय में दाखिला लेने लगे हैं।

आरिफ ने वर्ष 2014 में विद्यालय में ज्वाइन किया था। यहां बच्चों की उपस्थिति बहुत ही कम थी। तत्कालीन प्रधानाध्यापिका के स्थानांतरण के बाद सारी जिम्मेदारी आरिफ के कन्धों पर ही आ गई। उस समय विद्यालय में 62 बच्चे और सिर्फ 1 सहायक अध्यापिका थीं। उनमें भी सिर्फ 17 बच्चे ही विद्यालय में पहले दिन मिले। परिजन अपने बच्चों को स्कूल भेजने से परहेज करते थे। मेन गेट पर जलभराव व कीचड़ से निकलकर बच्चों को स्कूल जाना पड़ता था। स्वस्थ शैक्षिक माहौल ही नहीं था। वहीं अनुशासन के पूर्ण अभाव के चलते अभिभावकों का विद्यालय से कोई लगाव नहीं रह गया था। कुछ अभिभावकों ने बच्चों का नामांकन निजी स्कूलों में भी करा रखा था।

नहलाकर बच्चों को बाइक से लाते थे स्कूल
पहले तो उन्होंने अभिभावकों को बच्चों को स्कूल भेजने को प्रेरित किया। फिर स्कूल आने से पहले गांव पहुंचकर बच्चों को नहलाकर अपनी बाइक पर बैठाकर स्कूल लाने लगे। उनका यह जज्बा देखकर अब गांव के लोग बच्चों को खुद स्कूल भेजने लगे। इस विद्यालय में अब 180 बच्चों का नामांकन हो चुका है। जिसमें हर रोज बच्चों की उपस्थिति 80 से 90 प्रतिशत होती है। जिस दिन स्कूल में बच्चों की उपस्थिति कम होती है तो फिर से बाइक उठाकर गांव से बच्चों को स्कूल ले आते हैं।

बाल केंद्रित माहौल बनाने का प्रयास
नियमित विद्यालय आने वाले बच्चों को दैनिक शाब्दिक, करतल ध्वनि प्रोत्साहन के साथ माह के अंत में अभिभावकों सहित सम्मानित करने की व्यवस्था की शुरुआत की। फलस्वरूप अधिकांश बच्चों में नियमित विद्यालय आने की व अभिभावकों द्वारा बच्चों को नियमित स्कूल भेजने की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। स्वच्छता संबन्धी आदतें विकसित करने के क्रम में बच्चों को नियमित साबुन या हैण्डवाश से हाथ धुलवाकर पंक्तिबद्ध बैठाकर भोजन की व्यवस्था प्रारम्भ कराई। कक्षा को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी कक्षा मॉनिटर सहित बाल समिति को दी।

बालिका शिक्षा व हरियाली को दिया महत्व
ग्रामीण क्षेत्र में अभिभावकों द्वारा बालिकाओं को स्कूल भेजने के डर को घर घर जाकर निकाला। घर के कार्य में हाथ बंटाने वाली बालिकाओं को विद्यालय तक लाने के लिए अभिभावकों से सम्पर्क किया, उनके साथ बिताया। नतीजन स्कूल में 160 छात्रों में 60 प्रतिशत से अधिक बालिकाएं हैं। राष्ट्रीय पवरें, बच्चों के जन्मदिन, महत्वपूर्ण दिवस का आयोजन भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ प्रबन्ध समिति एव अभिभावकों की उपस्थिति में करने और उनके हाथों से परिसर में पेड़ पौधे लगाने की परम्परा की शुरुआत कराई।

छुट्टी में भी विद्यालय को देते सुंदरता
आरिफ कई बार छुट्टी के दिन भी विद्यालय आ जाते हैं और खुद साफ़ सफाई करते हैं। खुद फावड़ा चलाकर स्कूल के आसपास फैली गन्दगी को साफ़ भी करते हैं। उन्होंने बताया की इस बहाने से स्कूल में लगे पेड़ पौधों को भी पानी दे जाते हैं। कुछ दिन पूर्व आरिफ ने खुद के पैसों से विद्यालय में बच्चों को सुविधा देने हेतु एक सबमर्सिबल का भी निर्माण कराया है। आरिफ स्कूल से 23 किमी दूरी दिबियापुर से हर रोज विद्यालय आते हैं।

मेहनत ने बना दिया अंग्रेजी माध्यम विद्यालय
पिछले वर्ष इस विद्यालय का नाम प्राथमिक विद्यालय रुरुगंज प्रथम हुआ करता था। लेकिन प्रधानाध्यापक की मेहनत और बच्चों की बड़ी संख्या के कारण विद्यालय का नाम भी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में आ गया। अब बच्चे और भी बढ़ गए हैं। विद्यालय परिसर की हरियाली देखते बनती है। ग्राम प्रधान कांति देवी का योगदान भी इसमें सराहनीय रहा है।

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