बाइक-कार का माइलेज बढ़ाने का धांसू जुगाड़, पिकअप-ड्राइविंग को भी कर देगा बेमिसाल

हैदराबाद स्थित एक तकनीकी विशेषज्ञ ने वाहनों के लिए माइलेज बूस्टर विकसित किया है, जो वाहन के पिकअप में सुधार, कार्बन फुटप्रिंट को कम करने और प्रति लीटर ईंधन के माइलेज में सुधार करता है।

नई दिल्ली। क्या आप भी पेट्रोल के आसमान छूते दामों के बीच अपने वाहन के कम माइलेज से परेशान हैं? अगर आपका जवाब हां में है, तो आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी है। कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के उद्देश्य से हैदराबाद के एक तकनीशियन ने वाहनों के लिए एक इनोवेटिव माइलेज बूस्टर विकसित किया है जो ईंधन बचाने में मदद करता है।

5M माइलेज बूस्ट के डेवलपर और चीफ टेक्नोलॉजिस्ट डेविड एशकोल काफी समय से इनोवेशन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। कार्बन फुटप्रिंट को प्रभावी ढंग से कम करने वाले इनोवेशन में अपने हिस्से का योगदान करने के इरादे से उन्होंने 5M माइलेज बूस्ट विकसित किया है। दावा है कि इस तकनीकी के चलते वाहनों के माइलेज में 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है और एक्सीलरेशन और पिकअप में 20 फीसदी तक की।

इसके नाम में लिखे '5M' इस माइलेज बूस्टर के पांच लाभों के लिए है। एशकोल के मुताबिक, यह बूस्टर प्रति लीटर ईंधन में अधिक माइलेज, वाहनों के लिए ज्यादा पिकअप, ड्राइविंग में अधिक सुगमता, अधिक टॉर्क और थ्रस्ट देने के साथ ही सबसे महत्वपूर्ण रूप से ज्यादा प्रदूषण नियंत्रण में मदद करता है।

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए एशकोल ने कहा, "यह 5M माइलेज बूस्ट एक इनोवेशन है जो बिना इंजन खोले ही वाहन के इंजन पर काम करता है। 5M माइलेज बूस्ट की विकसित मशीन, इनटेक मैनिफोल्ड के माध्यम से वाहन के इंजन से जुड़ी होती है। इंजन की क्षमता (सीसी) के आधार पर अल्ट्रासोनिक तरंगें और गैसीय प्लाज्मा को कुछ समय के लिए इंजन में भेजा जाता है।"

उन्होंने कहा कि माइलेज बूस्टर 2014 में विकसित किया गया था और 2008 से वह एक ऐसी मशीन पर काम कर रहे हैं जो न केवल वाहन का माइलेज बढ़ाने में मदद करेगी बल्कि कार्बन उत्सर्जन को यथासंभव कम करके पर्यावरण में भी योगदान
देगी।

एशकोल ने बताया कि अब तक वह दोपहिया, चार पहिया वाहनों और कुछ मामलों में ट्रकों और बसों सहित लगभग 8,000 वाहनों के इंजन को बूस्ट करने में सक्षम रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस इनोवेशन का इस्तेमाल करके 100 सीसी से 10,000 सीसी के बीच के किसी भी वाहन को बेहतरीन प्रॉसेस किया जा सकता है।

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इसकी प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, "सामान्य तौर पर जब कोई वाहन किसी भी ईंधन के रूप में 100 यूनिट ऊर्जा लेता है तो पहियों को चलने के लिए केवल 12.6 यूनिट ऊर्जा दी जाती है, जबकि बाकी ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा है विभिन्न स्तरों पर घर्षण को दूर करने के लिए बेकार चला जाता है। हमारा इनोवेशन इन घर्षण बिंदुओं पर काम करता है और वाहनों को कम ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए तैयार करता है।"

एशकोल ने आगे कहा कि वह इस तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए एक स्थापित ऑटोमोबाइल इकाई की तलाश कर रहे हैं जो उन्हें अपने वाहनों के लिए कम कार्बन उत्सर्जन के साथ-साथ बढ़े हुए माइलेज की पेशकश करने में मदद करेगी।

अगर बात करें इस किट की कीमत की तो बाइकों के लिए इसके दाम 2,000 रुपये से शुरू होकर 4,500 रुपये तक जाते हैं, जबकि कारों के लिए 4,000 से लेकर 10,000 रुपये तक। वहीं, ट्रक-बस जैसे भारी वाहनों के लिए इसकी शुरुआती कीमत 25,000 रुपये है।

अमित कुमार बाजपेयी
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