अयोध्या में मोक्ष प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने की पंचकोसी परिक्रमा

-बाहरी श्रद्धालुओं का अयोध्या में बैन, सुरक्षा के किए गए थे कड़े इंतजाम

By: Mahendra Pratap

Published: 25 Nov 2020, 04:47 PM IST

अयोध्या. अयोध्या में चौदह कोसी परिक्रमा के ठीक एक दिन बाद पंचकोसी परिक्रमा शुरू हो जाती है। बुधवार को आज जब भगवान विष्णु नींद से जगे तो शुभ मुहूर्त की शुरूआत हो गई। अब शादी समेत सभी शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहुर्त शुरू हो गए हैं। इसके साथ ही अयोध्या में मोक्ष के लिए ब्रह्म मुहूर्त से पंचकोसी परिक्रमा भी शुरू हो गई। पंचकोसी परिक्रमा के लिए इस बार कोराना की वजह से सिर्फ अयोध्या की जनता और वहां के साधु संत शामिल हुए। बाहरी श्रद्धालुओं के प्रवेश पर जिला प्रशासन ने रोक लगा रखा है। कोरोना और सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन ने सख्त इंतजाम किए है। सुरक्षा व्यवस्था जहां जवान मुस्तैद हैं वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीमें जगह-जगह अलर्ट हैं।

परिक्रमा में 6000 देवी-देवताओं के मंदिर शामिल :- राम नगरी अयोध्या में 5 कोस यानि 15 किलोमीटर की परिक्रमा परिधि पवित्र सरयू नदी में स्नान ध्यान से शुरू होता है। और इस परिक्रमा को तिथि के अंदर ही पूरा करना होता है। इस परिक्रमा में अयोध्या में भगवान श्रीराम के जन्म स्थल के साथ 6000 देवी-देवताओं की प्रमुख मठ मंदिर स्थित है। जिसकी परिक्रमा बहुत ही पवित्र मानी जाती है। और ऐसी मान्यता है कि अयोध्या में स्थित सभी देवी देवताओं के मंदिरों की पूजा अर्चन एक साथ पूरा होता है।

15 किमी. परिधि की होती है पंचकोसी परिक्रमा :- अयोध्या में राममंदिर निर्माण शुरू होने के बाद होने जा रही पहली पंचकोसी परिक्रमा को लेकर भक्तों में खासा उत्साह है। पंचकोसी परिक्रमा अयोध्या के 15 किमी. की परिधि में होती है। पंचकोसी परिक्रमा अयोध्या के सरयू घाट से शुरू हो कर हनुमान गुफा, राम मंदिर निर्माण कार्यशाला, बड़ी छावनी, महर्षि आश्रम, मौनी बाबा कुटिया, दशरथ कुंड, जालपा देवी मंदिर, चक्रतीर्थ स्थल, ब्रह्म कुंड गुरुद्वारा, कौशल्या घाट, साईं बाबा कुटिया मंदिर, राजघाट पार्क के साथ सरयू घाट के किनारे स्थित झुनकी घाट आश्रम, सद्गुरु सदन मंदिर, लक्ष्मण किला, सहस्त्रधारा लक्ष्मण घाट स्थित शेष अवतार लक्ष्मण मंदिर का दर्शन पूजन कर सरयू घाट पर समाप्त होती है।

मनुष्य को प्राप्त होता है मोक्ष : सत्येंद्र दास

रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि, अयोध्या की पंचकोसी परिक्रमा प्राचीन परंपरा है। सदियों से इस परंपरा के तहत अयोध्या में परिक्रमा की जाती है। और ऐसा माना गया है कि मनुष्य शरीर पांच भौतिक तत्वों से बना है और अयोध्या की पंचकोसी परिक्रमा करने से अधर्म और पाप समाप्त हो जाते हैं। शरीर की बुराइयां भी नष्ट होती हैं और मनुष्य को मोक्ष प्राप्त होता है। अत: इस परिक्रमा का बड़ा महत्व है। इसलिए लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते हैं। लेकिन इस वर्ष कोरोना की वजह से अयोध्या से बाहरी श्रद्धालुओं के प्रवेश पर बैन लगा हुआ है।

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