चंपत राय का बड़ा बयान, बोले-विवादित जमीन पर नमाज नहीं पढऩे देंगे

संतों ने मोदी सरकार को दिया अल्टीमेटम मंदिर नहीं तो सरकार नहीं.

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Published: 25 Nov 2018, 06:52 PM IST

अयोध्या . विश्व हिंदू परिषद ने रविवार को विशाल धर्मसभा में भव्य राम मंदिर के निर्माण को लेकर हुंकार भरी। विहिप के उपाध्यक्ष चंपत राय ने कहा है कि अयोध्या में अब जमीन का बंटवारा बर्दाश्त नहीं है। उन्होंने धर्मसभा में आए लाखों लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अब हमारे सब्र की परीक्षा मत लें। जमीन बंटवारे का फार्मूला हमें मंजूर नहीं है। सुन्नी वक्फ बोर्ड अपना दावा वापस ले। हमको यहां पर राम मंदिर बनवाने के लिए पूरी जमीन की जरूरत है। कहा कि छीन कर गई जमीन पर नमाज हमें स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ विद्वान ऐसा मानते हैं कि कि राम मंदिर मुद्दा बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद से शुरू हुआ है, लेकिन, यह लड़ाई पिछले 490 वर्षों से लगातार जारी है।

चंपत राय ने धर्मसभा का औचित्य स्पष्ट करते हुए कहा कि 25 साल बाद आज यहां फिर जुटने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि देश के कथित बुद्धिजीवियों को यह भ्रम हो गया था कि रामजन्म भूमि पर मंदिर निर्माण का प्रश्न 6 दिसंबर 1992 को समाप्त हो चुका है। वस्तुत: यह आग अभी बुझी नहीं है बल्कि अंदर अंदर सुलग रही है। उन्होंने अपने स्वागत भाषण में कहा कि मुसलमानों को अपना मुकदमा वापस लेना चाहिए। हमको अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनाने के लिए पूरी जमीन चाहिए। हम एक इंच टुकड़ा भी नहीं छोड़ेंगे। कहा कि मुस्लिम समाज को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपना केस वापस लेना चाहिए। चंपत राय ने कहा कि आज की धर्म सभा में पूर्वी उत्तर प्रदेश के 48 जिलों से राम भक्त आए हैं। यह तो छोटी सी झलक है, जिस दिन देशभर का हिंदू समाज अयोध्या में एकत्र होगा उस दिन उत्तर प्रदेश की सड़कें राम भक्तों से भर जाएंगी।

PM को राम मंदिर पर निर्णय लेना होगा

विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा प्रायोजित देश के तीन स्थानों अयोध्या, बैंगलोर और नागपुर में विराट धर्मसभा कार्यक्रमों की कड़ी में अयोध्या में आयोजित धर्मसभा के मंच से देश के शीर्ष संतों ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर दबाव बनाया। संतों ने कहा कि अब इस मुद्दे पर देश का संत समाज शांत नहीं बैठने वाला है। प्रधानमंत्री को स्वयं आगे आकर राम मंदिर पर निर्णय लेना होगा। केंद्र से लेकर राज्य जिले और नगर में भाजपा की सरकार है। देश के राष्ट्रपति से लेकर अयोध्या नगर के पार्षद तक भारतीय जनता पार्टी के हैं। अब इससे सुंदर मौका फिर से नहीं मिलेगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राम मंदिर का निर्माण करा कर अपना नाम अमर करा देना चाहिए।

ये बड़े संत हुए शामिल
धर्मसभा में जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य, रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, हरिद्वार के जगतगुरु रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य, महानिर्वाणी अखाड़ा के महंत रङ्क्षवद्रपुरी, दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, जगतगुरु रामानुजाचार्य वासुदेवाचार्य तथा महामंडलेश्वर उड़ीसा के स्वामी ज्ञानानंद गिरी समेत करीब चार दर्जन बड़े संत व विशिष्टजन शामिल हुए। इनके साथ ही आरएसएस के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल समेत संघ व विहिप के कुछ अन्य बड़े नेता भी शामिल हुए।

Ayodhya verdict
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