Exclusive : अयोध्या में आज भी हाथों से तुलसी का कंठी बनाये जाने की है परंपरा

अयोध्या के संतों में प्राचीन है तुलसी का कंठी धारण करने की परंपरा

By: Satya Prakash

Updated: 08 Oct 2020, 10:49 PM IST

अयोध्या : राम नगरी अयोध्या में संतो की परंपरा के बीच तुलसी कंठी धारण की परंपरा भी प्राचीन है। यह परंपरा वैष्णव सम्प्रदाय द्वारा आज भी मठ मंदिरों में पूजा पाठ के साथ निभाई जाती है। संतों की माने तो तुलसी धारण करने से अकाल मृत्यु हुई पीछे हट जाती है। और आज भी हाथों से ही कंठ को तैयार किया जाता हैं।

राम नगरी अयोध्या में हाथ से तुलसी का कंठी बनाए जाने की परंपरा आज भी इस आधुनिक काल में दिखाई देता है। अयोध्या के राम को क्षेत्र में कंठी बनाए जाने में अपना पूरा जीवन गवा चुके मुन्ना सिंह आज भी हाथ से ही तरह-तरह के आकृति के रूप में इस कंठी को तैयार करते हैं। जिसे अयोध्या के मठ मंदिरों में रहने वाले संत इस कंठी को धारण करते हैं। मुन्ना सिंह के मुताबिक अयोध्या में हीं तुलसी की लकड़ियों को इकट्ठा करते हैं जिसके बाद उन लकड़ियां से कंठी को तैयार करते हैं उन्होंने बताया कि एक दिन में कितना तैयार कर लेते हैं इसकी गिनती भी नहीं है।

संत अयोध्या दास अयोध्या में तुलसी माला के महत्व को बताते हुए बताया कि जो तुलसी का माला लेकर सीताराम करते हुए एक माला फेरे तो हजार माला की बराबर पुण्य प्राप्त होता है। वहीं कहा कि गले में तुलसी की माला पहनने से गंगा की तरह पवित्र माना जाता है। और इसी से अकाल मृत्यु भी टल जाती है और इस तुलसी का जितना बड़ा महत्व है उतना बड़ा महत्व सोना चांदी और ना ही हीरा का है। इसलिए संत हार की तरह बनवाते हैं पहनते हैं और माला भी फेरते हैं। वह कहा कि हाथों से ही तुलसी का कंठी तैयार किया जा सकता है इसे किसी भी प्रकार की मशीन तैयार नहीं कर सकती है।

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