scriptFestival of Shri Ramlala celebrated in Ayodhya | अयोध्या में मनाया गया श्री रामलला का उत्सव | Patrika News

अयोध्या में मनाया गया श्री रामलला का उत्सव

राम जन्मभूमि परिसर में विराजे भगवान श्री राम लला के 73वें प्रकट उत्सव पर भव्य शोभायात्रा के साथ साधु संतों ने की रामकोट की परिक्रमा

अयोध्या

Updated: January 05, 2022 11:38:51 pm

अयोध्या. भगवान श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण के बीच मनाए जा रहे प्राकट्य उत्सव में आज रामजन्मभूमि परिसर में विराजमान भगवान श्री रामलला के 73 वां प्राकट्योत्सव पर बाजे गाजे के साथ रथ पर सवार श्री राम का प्रतीकात्मक स्वरूप को लेकर अयोध्या के साधु संतों ने शोभायात्रा निकाली। यह यात्रा सुरक्षा व्यवस्था के बीच क्षीरेश्वर महादेव मंदिर से निकलकर रामकोट की परिक्रमा करते हुए वापस उसी स्थान पर समाप्त हुआ। इस यात्रा में बाबा अभी रामदास के शिष्य महंत धर्मदास भी शामिल हुए।
अयोध्या में मनाया गया श्री रामलला का उत्सव
अयोध्या में मनाया गया श्री रामलला का उत्सव

1949 में श्री रामलला का हुआ था प्राकट्य


रामजन्मभूमि पर विराजमान भगवान श्री रामलला का प्राकट्य 1949 में हुआ जिसके बाद से रामजन्मभूमि सेवा समिति रामलला के प्राकट्य उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है इस वर्ष भगवान श्री राम के भक्त मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है तो वही आज के इस भगवान के प्राकट्य उत्सव हर्ष उल्लास से भरा रहा। इस महोत्सव के पहले दिन रामलला के दरबार में कलश स्थापना और धार्मिक अनुष्ठान किया गया तो वहीं दूसरे दिन अयोध्या के संत महत्त्व श्री राम जन्मभूमि सेवा समिति ने भव्य बारात का आयोजन किया जिसमें हाथी घोड़ा और गाजे-बाजे के साथ दो रथों पर सवार होकर प्रतीकात्मक रूप में भगवान श्री राम चारों भाइयों के साथ रामकोट की परिक्रमा किया।

1992 के बाद राम जन्मभूमि परिसर से बाहर मनाया जा रहा प्राकट्य उत्सव


विराजमान भगवान श्री राम लला का प्राकट्य उत्सव पहले राम जन्मभूमि में बड़े ही उल्लास के साथ मनाया जाता रहा है लेकिन बीते 1992 की घटना के बाद यह पूरा आयोजन परिसर के बाहर कर दिया गया। जिसे के कारण आज भी रामलला के प्राकट्य उत्सव को क्षीरेश्वर नाथ मंदिर में मनाया जा रहा है। इस वर्ष भी सेवा समिति के द्वारा इस वर्ष 2 दिवसीय प्राकट्य उत्सव का आयोजन किया गया। इसी उत्सव के आखिरी दिन भव्य शोभायात्रा बाजे गाजे के साथ भगवान श्रीराम व उनके तीनों भाइयों के साथ प्रतीकात्मक स्वरूप में रथ पर सवार होकर निकाला गया। इस यात्रा में राम जन्मभूमि परिसर में मूर्ति को स्थापित करने वाले बाबा अभिराम दास के चित्र को भी लगाया गया।

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