70 वर्ष के बाद बदला अयोध्या का इतिहास मंदिर में विराजे रामलला

23 दिसंबर 1949 को ब्रह्म मुहूर्त में ही श्री राम जन्म स्थान पर हुआ भगवान श्री रामलला का प्राकट्य : सत्येेंद्र दास

अयोध्या : 70 साल बाद एक बार फिर अयोध्या का इतिहास बदला और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामलला चांदी के सिंघासन पर सुबह 5 बजे अपने अस्थाई मंदिर में विराजमान हुए। और इस वैदिक रीति रिवाज से ब्रह्म मुहूर्त में अपने अस्थाई भवन में चांदी के सिंघासन पर विराजमान हुए। इस दौरान परिसर में अयोध्या के प्रमुख संत व उत्तर प्रदेश के मुखिया सीएम योगी आदित्यनाथ इस छड के गवाह बने।

बताते चलते हैं कि आज से 70 वर्ष पूर्व 23 दिसंबर 1949 में भगवान श्री रामलला ब्रह्म मुहूर्त 5 बजे विवादित ढांचा में प्रकाट्य हुआ था। और अयोध्या के इतिहास में नया पन्ना लिखा गया लेकिन भगवान के प्राकृतिक के बाद मंदिर मस्जिद को लेकर विवाद शुरू हो गया 1989 में उस विवादित ढांचे के गेट का ताला खोला गया जिसके बाद भगवान श्री रामलला का पूजा पाठ प्रारंभ हुआ और 6 दिसंबर 1992 में भगवान श्री रामलला उस विवादित ढांचे को राम भक्तों के द्वारा हटा दिया गया और उन्हें कपड़े के टेंट में विराजमान होना पड़ा लंबे इंतजार के बाद आज एक बार फिर अयोध्या फिर से उस इतिहास को दोहराया गया और 70 वर्ष के बाद भगवान श्रीरामलला को एक बार फिर मंदिर में विराजमान कराया गया लेकिन यह मंदिर अभी अस्थाई स्वरूप है जल्द ही भव्य मंदिर निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी

अयोध्या कि इस दृश्य को रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास के मुताबिक जमाने तो आज से ठीक 70 वर्ष पूर्व 23 दिसंबर 1949 में भगवान श्री रामलला रामजन्मभूमि परिसर में प्राकट्य हुआ था उसके बाद हुए आंदोलन व विवादित ढांचे को गिराए जाने के बाद टेंट में विराजमान हुए लेकिन आज एक बार फिर 70 वर्ष के बाद भगवान श्री राम लला अपनी उसी समय ब्रह्म मुहूर्त में पुनः मंदिर में विराजमान हुए हैं।वहीं अयोध्या के संतों के मुताबिक आज अयोध्या के लिए बड़े ही अद्भुद छड़ है। लेकिन देश में चल रहे महामारी के कारण कोई बड़ा उत्सव नही मनाया जा सकता है लेकिन आज के बाद आने वाले समय में यह उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा।

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Satya Prakash
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