Makar Sankranti : खिचड़ी मकर संक्रांति पर संगम नहान के बाद सरयू में डुबकी लगाने की है मान्यता

-अयोध्या की मकर संक्रांति सबसे अनूठी और अलग
-रामलला को भोग में चढ़ती है खिचड़ी,पापड़ और अचार
-इसके बाद हनुमानगढ़ी में लगता है तिल और चावल के लडडू का भोग

By: अनूप कुमार

Published: 03 Jan 2020, 06:22 PM IST

पत्रिका इन्डेप्थ स्टोरी
अनूप कुमार/सत्य प्रकाश


अयोध्या. मकर संक्रांति पूरे देश में अलग-अलग तरीकों से मनायी जाती है। लेकिन, धर्मनगरी अयोध्या की मकर संक्रांति सबसे अनूठी और अलग होती है। इस दिन पूरे पहले रामलला को खिचड़ी,पापड़ और अचार का भोग लगता है फिर हनुमानगढ़ी में तिल और चावल के बने विशेष लड्डुओं का दान किया जाता है। खास बात यह है कि भले ही पूरे देश में 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनायी जाती है और लाखों लोग इस दिन प्रयागराज में मां गंगा में डुबकी लगाने पहुंचते हैं। लेकिन, अयोध्या में खिचड़ी के दो दिन बाद सरयू में डुबकी लगाने भक्त पहुंचते हैं। यानी गंगा स्नान के बाद सरयू स्नान के बाद ही मकर संक्रांति की पूजा पूरी होती है।


सरयू स्नान की महत्ता


जगतगुरु राम दिनेशाचार्य बताते हैं कि मकर संक्रांति को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के उत्तरायण होने पर मोक्ष प्राप्ति का योग बनता है। इसीलिए इस दिन लोग गंगा स्नान कर अन्न और वस्त्र आदि दान करते हैं। तीर्थराज प्रयाग में इसीलिए करोड़ों श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाते हैं। लेकिन, गंगा स्नान के बाद लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते हैं और दो दिन बाद सरयू में डुबकी लगाते हैं, तब कहीं जाकर वे खुद को पापमुक्त महसूस करते हैं।


सरयूतट पर खिचड़ी भोज का पुण्य लाभ


सरयू तीर्थ पुरोहित समाज के अध्यक्ष ओमप्रकाश पांडे के मुताबिक मकर संक्रांति पर सरयू किनारे खिचड़ी भोज का बहुत पुण्यलाभ मिलता है। सरयू में डुबकी के बार रामलला का दर्शन और उन्हें खिचड़ी दान का अलग महात्म्य है। पावन सलिला सरयू में डुबकी के बाद भगवान सूर्यदेव का पूजन-अर्चन और तिल, खिचड़ी व गऊ दान करने पर सभी तरह के कष्ट कट जाते हैं।


रामलला में विशेष आयोजन


मकर संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त में सरयू स्नान के बाद मठ-मंदिरों में दान और पूजन-अर्चन का सिलसिला चलता है। यहां के नागेश्वरनाथ मंदिर, हनुमानगढ़ी, कनकभवन, रामलला, और क्षीरेश्वरनाथ मंदिर में दर्शन का विशेष महत्व है। विशेषकर रामजन्मभूमि में भगवान रामलला को खिचड़ी पर्व पर पूजन-अर्चन उपरांत खिचड़ी, दही, पापड़, घी व अचार का भोग लगाना बहुत फलदायी माना जाता है। इसी तरह बजरंगबली की प्रधानतम पीठ हनुमानगढ़ी में हनुमंतलला को खिचड़ी, घी, अचार, पापड़, दही व तिल आदि का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु मणिरामदास छावनी में गरीब, निराश्रितों को खिचड़ी का दान करते हैं। इसी तरह दशरथमहल बड़ास्थान, कनकभवन, सियारामकिला झुनकीघाट, लक्ष्मण किला, हरिधामगोपाल मंदिर, रंगमहल, जानकीघाट बड़ास्थान, राजगोपाल समेत तमाम मंदिरों में भी खिचड़ी के दिन खूब रौनक रहती है।

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अनूप कुमार Desk/Reporting
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