जल्द सामने आएगा नए राम मंदिर के ट्रस्ट का स्वरूप, चढ़ावे और दान के लिए रामलला देंगे 10 करोड़

विवादित स्थल पर मंदिर के निर्माण का फैसला आने के बाद अब इस मामले में नए राम मंदिर के ट्रस्ट को लेकर भी कवायद शुरू कर दी है

अयोध्या. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण (Ayodhya Verdict) का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट ने छह महीने के भीतर एक ट्रस्ट बनाकर मंदिर निर्माण के रुपरेखा की स्थिति साफ करने को कहा। विवादित स्थल पर मंदिर के निर्माण का फैसला आने के बाद अब इस मामले में नए राम मंदिर के ट्रस्ट को लेकर भी कवायद शुरू कर दी है। ट्रस्ट का स्वरूप कैसा होगा इसे लेकर तमाम तरह की संभावनाएं जताई जा रही हैं। वहीं, रामलला विराजमान की संपूर्ण संपत्तियां सरकार की ओर से बनने वाले नए राम मंदिर के ट्रस्ट को मिलेंगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशनुसार वर्तमान में रामलला से संबंधित सभी संपत्तियां नए राम मंदिर ट्रस्ट के पास जाएंगी। रामलला के चढ़ावे और दान के रूप में करीब 10 करोड़ की नकदी भी ट्रस्ट के हिस्से में जाएगी। यह रकम कमिश्नर अयोध्या के खाते में जमा है। केंद्र सरकार को इस संबंध में रिपोर्ट भेज दी गई है।

ट्रस्ट के स्वरूप पर संभावनाएं

अब तक रामलला को मिलने वाले चढ़ावे और दान का हिसाब कमिश्नर के बैंक खाते से ही होता है। लेकिन नई व्यवस्था के अनुसार, ये सारा काम अब ट्रस्ट करेगा। बता दें कि रामलला के नाम भू-संपत्ति दर्ज नहीं है, भूमि नूजल के खाते में है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार ढाई एकड़ भूमि पर बनने वाले भव्य राम मंदिर के लिए अधिगृहित 67 एकड़ भूमि की देखरेख भी सरकार की ओर से बनने वाला ट्रस्ट करे। इसके अलावा ट्रस्ट का आधार कैसा होगा, उसे किस तरह बनाया जाएगा इसे लेकर दो तरह की संभावनाएं जताई जा रही हैं। पहला राष्ट्रपति की ओर से सीधे ऑर्डिनेंस के जरिये और दूसरा संसद में नया बिल लाकर।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले हर दूसरे रविवार को विवादित परिसर का निरीक्षण होता था। अब क्योंकि विवादित स्थल पर क्या बनना है इस पर फैसला आ गया है, तो विराजमान रामलला के मेक शिफ्ट स्ट्रक्चर समेत आसपास की साफ-सफाई, खोदाई में मिली ऐतिहासिक सामग्री, सुरक्षा आदि को लेकर दो जजों, कमिश्नर, एएसआई आदि अफसरों की टीम अब भी उसी तरह निरीक्षण करेगी।

पुजारियों के राग-भोग में नहीं होगी कमी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भव्य राम मंदिर तो बनेगा ही साथ ही उनके पुजारियों के पारिश्रमिक समेत राग भोग में भी कोई कमी नहीं आएगी। अब तक महंगाई को देखते हुए बजट तय होता था। रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सतेंद्र दास कहते हैं कि अयोध्या के हनुमानगढ़ी, कनक भवन, नागेश्वरनाथ आदि किसी भी मंदिर की तुलना में यहां का खर्च बहुत कम था। जैसे-तैसे राग-भोग और पुजारियों का जीवन यापन होता रहा है। मुख्य पुजारी के रूप में उन्हें 13 हजार रुपये मिलते थे, वहीं चार अन्य पुजारियों को आठ-आठ हजार रुपये दिए जाते थे। पुजारियों को मिलने वाला यह पारिश्रमिक सरकार के न्यूनतम वेतन अधिनियम से कम था।

आचार्य सतेंद्र दास ने कहा कि इस बार रामनवमी पर 51 हजार रुपये मिले थे। यह राशि पुछले बार की तुलना में ज्यादा था लेकिन फिर भी वस्त्र से लेकर पंचमेवा, पंचामृत आदि में 56 हजार रुपये खर्च हो गए। ऐसे में हर दिन के लिए तय अलग-अलग सात वस्त्र बनवाना, फटने पर उसे बदलते रहना मुश्किल होता था। कई बार पुराने वस्त्र फट जाते थे। वहीं, अयोध्या के तमाम मंदिर हैं, जहां भगवान को रोज नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। सतेंद्र दास कहते हैं कि राम मंदिर का दावा करने वाले तमाम लोग आज ट्रस्ट के नाम पर हक की बात करते हैं, लेकिन उन्हें कभी ध्यान नहीं आया कि रामलला को वस्त्र आदि का दान करें।

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Karishma Lalwani
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