scriptPrabhu Ram Lalla in chic after 500 years | 500 वर्ष के बाद ठाठ में प्रभु रामलला, शयन के लिए लगा पालना, गद्दा रजाई के साथ मिली मच्छरदानी | Patrika News

500 वर्ष के बाद ठाठ में प्रभु रामलला, शयन के लिए लगा पालना, गद्दा रजाई के साथ मिली मच्छरदानी

रामलीला के पक्ष में फैसला आने के बाद अस्थाई मंदिर में विराजमान हुए श्री रामलला को गुनगुने पानी से स्नान के बाद गर्म कपड़े से हो रहा श्रृंगार

अयोध्या

Published: December 23, 2021 09:53:55 am

अयोध्या. 500 वर्षों के बाद भगवान श्री रामलला कैंट से निकलकर सुंदर भवन में विराजमान होने के साथ मौसम के अनुकूल सुविधाएं भी मिलने लगी है। अयोध्या में पड़ रही कड़ाके की ठंड से बचने के लिए पहली बार श्री रामलला पालना में विराजमान हैं। रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास के मुताबिक ग्रंथों की माने तो त्रेतायग के बाद पहली बार रामलला को इस प्रकार की व्यवस्था हो रही है।
500 वर्ष के बाद ठाठ में प्रभु रामलला, शयन के लिए लगा पालना, गद्दा रजाई के साथ मिली मच्छरदानी500 वर्ष के बाद ठाठ में प्रभु रामलला, शयन के लिए लगा पालना, गद्दा रजाई के साथ मिली मच्छरदानी
500 वर्ष के बाद ठाठ में प्रभु रामलला, शयन के लिए लगा पालना, गद्दा रजाई के साथ मिली मच्छरदानी
पालना में शयन कर रहे प्रभु श्री रामलला

प्रभु श्री रामलला को शयन के लिए पालना मिल गया है। भगवान अब पालना रूपी पलंग पर रात्रि में शयन कर रहे हैं । बकायदा अब भगवान को शयन आरती के बाद पालना रूपी पलंग पर शयन के लिए रखा जाता है फिर भगवान को एक रजाई भी उड़ाई जाती है। जिससे कि ठंड से बचत हो सके। यही नहीं भगवान का जो पालना रूपी पलंग है उसमें मखमली गद्दा और दो मशलन्द रूपी तकिया भी रखा गया है। भगवान को मच्छरों से बचाने के लिए पालना रूपी पलंग के चारों ओर बहुत सुंदर सी मच्छरदानी भी लगाई गई है। यह सुविधा रामलला को 500 वर्षों के बाद प्राप्त हुई है। यही नहीं भगवान को ठंड से बचाने के लिए ब्लोवर का भी इंतजाम किया गया है।
ठंड से बचाने के लिए रामलला के लिए बढ़ाई गई व्यवस्था

मुख्य पुजारी रामलला आचार्य सत्येंद्र दास जे मुताबिक शुरुआती दौर में भगवान लकड़ी के सिंहासन पर विराजमान थे। और जब रामलला के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया तो राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भगवान के सिंहासन लकड़ी का हटाकर चांदी का कर दिया और भगवान चांदी के सिंहासन पर विराजमान थे। रामलला उसी चांदी के सिंहासन पर शयन भी करते थे। लेकिन अब शयन के लिए पालना रूपी पलंग आ गया है। जिसमें रामलला रात्रि में शयन आरती के बाद चयन करते हैं । यही नहीं भगवान को ठंड में बचाने के लिए उनका स्नान गुनगुने पानी से कराया जाता है और गरम चीजों का भोग भी भगवान को लगाया जाता है। भगवान को गर्म वस्त्र भी पहनाए जाते हैं। साथ ही भगवान के लिए विशेष तरीके की रजाई भी ट्रस्ट ने उपलब्ध कराया है।

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