राम मंदिर आंदोलन से निर्माण तक सिंघल जी की रही अहम भूमिका : विहिप

-विश्व हिंदू परिषद के अयोध्या मुख्यालय कारसेवकपुरम में स्वर्गीय अशोक सिंघल को दी गई श्रद्धांजलि

-स्व. अशोक सिंघल की थी कल्पना मंदिर निर्माण से बदलेगा भारत की राजनीति व चरित्र : राजेंद्र सिंह पंकज

By: Satya Prakash

Published: 17 Nov 2020, 05:10 PM IST

अयोध्या : राम मंदिर आंदोलन के अगुआ कर रहे स्वर्गीय अशोक सिंघल को पांचवी पुण्यतिथि पर अयोध्या विश्व हिंदू परिषद मुख्यालय कारसेवक पुरम में श्रद्धांजलि अर्पित किया गया। इस दौरान विश्व हिंदू परिषद के कई बड़े पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

राम मंदिर निर्माण किस समय भले ही सूर्य अशोक सिंघल आज अयोध्या में उपस्थित ना हो लेकिन उनके मंदिर निर्माण के संकल्प को पूरा करने के लिए आज पूरा देश लगा हुआ है। और आज भी राम मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण तक सिंघल विशेष भूमिका रही। स्वर्गीय अशोक सिंघल राम जन्म भूमि पर भव्य मंदिर निर्माण को लेकर आंदोलन के मुख्य अगुवाकार रहे। 1950 से लेकर 2015 तक राम मंदिर को लेकर कई प्रकार की लड़ाइयां हुई। और सभी विवादों में प्रमुख रूप से रहे जिसके कारण बाबरी विध्वंस में भी मुख्य आरोपी बनाए गए थे और आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो चुका है। और आज राम मंदिर आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले स्वर्गीय अशोक सिंघल को आज विश्व हिंदू परिषद अयोध्या मुख्यालय कारसेवक पुरम में विहिप के पदाधिकारियों द्वारा कारसेवकपुरम में स्थित राम मंदिर मॉडल के पास अशोक सिंघल के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई इस दौरान विश्व हिंदू परिषद केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज, विश्व हिंदू परिषद केंद्रीय कार्यालय प्रभारी कोटेश्वर शर्मा, हैदराबाद प्रभारी डीएसएन मूर्ति, कारसेवक पुरम प्रभारी शिवदास व हजारीलाल सहित कई कार्यकर्ताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

विश्व हिंदू परिषद केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज ने बताया कि माननीय अशोक सिंघल जी दो-तीन कार्य अपने जीवन के लिए सोचे थे उसमें रामजन्मभूमि प्रमुख था और गंगा का विषय भी अपने झंडे में रखा हुआ था और एक गौवंशों को लेकर था और आज राम जन्मभूमि मंदिर का जो स्वरूप है उसकी पृष्ठभूमि में कोई शिल्पकार का नाम लिया जाएगा तो वह अशोक सिंघल जी का है। वही बताया कि अशोक सिंघल जी राम मंदिर का आंदोलन मंदिर निर्माण तक की नहीं रखना चाहते थे बल्कि इस मंदिर को दुबारा कोई आंख उठा कर ना देख सके ऐसी शक्ति पूरे देश हिंदू समाज के रूप में खड़ी करने की इच्छा थी। चा मंदिर राजनीतिक जिससे स्वाधीन हुआ है उसी तरह सांस्कृतिक दृष्टि से भी वह स्वाधीन हो यह भारत की सांस्कृतिक स्वाधीनता का आंदोलन है और साथ ही भारत के नवनिर्माण का भी आंदोलन है। वही बताया कि उनकी कल्पना थी कि राम जन्म भूमि का आंदोलन भारत की राजनीति और चरित्र को बदलेगा और खोए हुए स्वाभिमान को पुनः स्थापित करेगा 1989 में जब रामजन्मभूमि पर भगवा ध्वज फहराया गया तो उनका यही शब्द था कि जी पानीपत की लड़ाई में जो भगवा ध्वज छूट गया था आज वह राम जन्मभूमि स्वर्ग हिंदू वीरों ने सभी बाधाओं से लड़ते हुए फिर से भगवा को स्थापित कर दिया इसलिए अशोक जी के कल्पना से ही इस मंदिर का निर्माण हो रहा है।

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