विक्रमादित्य काल की हैं खंडित मूर्तियां, संतों ने कहा - मंदिर तोड़कर बनी थी मस्जिद

- संग्रहालय में रखा जाएगा समतलीकरण में मिले मंंदिर के अवशेषों को

By: Neeraj Patel

Updated: 21 May 2020, 08:00 PM IST

अयोध्या. राम जन्मभूमि में समतलीकरण के दौरान मिले मंदिर के अवशेष ने फिर से अयोध्या में हलचल बढ़ा दी है। यहां मिले अवशेष से यह साबित होता है कि मंदिर तोड़कर ही मस्जिद बनायी गयी थी। माना जा रहा है कि आमलक, कलश, पाषाण के खंभे, प्राचीन कुआं, शिवलिंग, खंडित मूर्तियां और चौखट आदि जो चीजें मिली हैं यह सब कम से कम दो हजार साल पुरानी विक्रमादित्य के शासन काल की हो सकती हैं। अयोध्या के संतों ने कहा है कि अब यह तय हो चुका है कि मंदिर तोड़कर ही मस्जिद बनी थी।

11 मई से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में समतलीकरण का कार्य चल रहा है। जेसीबी से खुदाई के दौरान मंदिर के प्राचीन अवशेष मिले हैं। इसकी पुष्टि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट ने की है। इन अवशेषों में शिवलिंग और देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां शामिल हैं। कहा जा रहा है कि रामजन्मभूमि परिसर में मिली मूर्तियां विक्रमादित्य युग के मंदिर की हो सकती हैं। समतलीकरण के कार्य में तीन जेसीबी , एक क्रेन, दो ट्रैक्टर और 10 मजदूर लगे हैं। मंदिर के अवशेषों को एक संग्रहालय में रखा जाएंगा। इन अवशेषों के मिलने पर संत समाज ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि हमारा विवादित स्थल के नीचे मंदिर होने का दावा सच साबित हो रहा है।

रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने कहा कि पहले से ही भगवान श्री राम का भव्य मंदिर उस स्थान पर था यह इसका यह प्रमाण है। मंदिर तोड़कर मस्जिद का निर्माण हुआ था। अवशेषों से लगता है कि यहां विशाल मंदिर था।

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जबकि, रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी अचार्य सत्येंद्र दास ने अवशेषों को मिलने के बाद कहा कि यह अवशेष 2000 वर्ष पुराने हो सकते हैं। भगवान की प्रतिमा का स्वरूप, चक्र, तीर, धनुष, शिवलिंग स्तंभ पर विभिन्न आकृतियां बनी हुई हैं उससे सिद्ध होता है कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद को बनाया गया था। हनुमानगढ़ी के पुजारी राजू दास ने कहा कि समतलीकरण में अवशेषों में कसौटीदार खंभे, चक्र, धनुष बने स्तंभ, टूटी-फूटी प्रतिमाओं से यह स्पष्ट हो गया है कि यह स्थान भगवान श्रीराम का जन्म स्थान है। 2000 वर्ष पूर्व महाराजा विक्रमादित्य ने यहां मंदिर का निर्माण करवाया था। जिसे तोड़कर मस्जिद का आकार दिया गया।

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