बड़ी खबर : राम मंदिर मॉडल के विरोध में बांटा जा रहा पत्रक

मंदिर निर्माण से पहले मॉडल के विरोध में उतरे हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता

By: Satya Prakash

Updated: 09 Jul 2020, 06:22 PM IST

अयोध्या : श्री राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण हो इसको लेकर अयोध्या में पत्रक तेजी से बांटा जा रहा है जिसमें विश्व की सबसे ऊंची मंदिर बनाए जाने की मांग की गई है। बट रहे इस पत्रक को लेकर जल्दी नया विवाद खड़ा हो सकता है।

राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की तैयारी तेज कर दी गई है 18 जुलाई को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अगली बैठक करने की तैयारी में है वहीं दूसरी तरफ हिंदू संगठन के कुछ कार्यकर्ता मंदिर मॉडल को लेकर पत्रक बांट रहे हैं माना जा रहा कि मंदिर निर्माण से पहले नया विवाद खड़ा करने की कोशिश की जा रही है। अयोध्या धर्म सेना के अध्यक्ष संतोष दुबे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर मंदिर निर्माण को लेकर पत्रक बांट रहे हैं जिसमें विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा बनाए जाने की मांग की है बांटे जा रहे पत्रक कुछ राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष को भी सौंपा है।

पत्रक द्वारा मंदिर निर्माण को लेकर की गई मांग

राम मंदिर निर्माण को लेकर बांटे जा रहे पत्रक में लिखा गया है कि 9 नवंबर 2019 को आए फैसले में 67.77 एकड़ के संपूर्ण क्षेत्र में राम मंदिर निर्माण हो जिसको लेकर पीएम नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह ने भी गगनचुंबी वह भव्य मंदिर निर्माण बनाए जाने की बात रैली के दौरान कही है लेकिन सरकार द्वारा गठित ट्रस्ट के तीन सदस्यों द्वारा मीडिया के माध्यम से कहा है कि रामलला छोटे हैं अच्छा छोटा मंदिर बनेगा। वहीं इस पत्र में 500 वर्षों से चल रहे इस संग्राम में लाखों हिंदुओं ने बलिदान गाथा का जिक्र किया है। साथ ही इस पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि रामजन्मभूमि परिसर में विश्व की सबसे ऊंचा व भव्य मंदिर अर्थात 67.77 एकड़ में बने साथ ही रामलला के साथ महाराजा दशरथ तीनों माताओं व इक्ष्वाकु वंश के समस्त राजाओं की प्रतिमाएं धार्मिक शास्त्रीय रूप में मंदिरों में प्रतिष्ठित की जाए और इतिहास के बारे में भी दर्शाया जाए जिससे आने वाली पीढ़ियां उनका अवलोकन कर आदर्शों को जीवन में उतार सकें साथ ही कहा गया है व राम जन्मभूमि गर्भगृह क्षेत्र में खुदाई करना हिंदू आस्था व भावनाओं को चोट करना है और मांग की गई है कि मंदिर निर्माण की ऊंचाई कम से कम लगभग 250 मीटर हो व मंदिर आंदोलन के दौरान शहीद हुए कारसेवकों को लेकर शिलाएं भी दर्शाई जाएं और रामजन्मभूमि परिसर में स्थित प्राचीन मंदिर व स्थानों की भी जीर्णोद्धार किए जाने की मांग की गई है।

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