विवादित ढांचे के ध्वंस को लेकर इस संत ने दिया ये बड़ा बयान

विवादित ढांचे के ध्वंस को लेकर इस संत ने दिया ये बड़ा बयान

बाबरी ढांचा ध्वंस के सवाल पर कहा कि उस समय जितने भी लोग मंच पर थे उन्हें कतई पता नहीं था कि ढांचा गिर जायेगा। लालकृष्ण आडवाणी, सिंधिया आदि लोग कारसेवकों को नीचे उतर आने को कह रहे थे, आडवाणी नहीं चाहते थे कि ढांचा गिरे, लेकिन कारसेवक नहीं माने परिणामतः ढांचा विध्वंस हो गया। 

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या एक धार्मिक कार्यक्रम में पहुंचे राममंदिर आन्दोलन से जुड़े संत स्वामी परमानंद गिरि महाराज ने पत्रकारों से वार्ता करते हुये कहा कि अयोध्या में राममंदिर की आस लिये कई संत शरीर छोड़ गये। रामचन्द्र दास परमहंस, सिंहल सरीखे लोगों का जीवन राममंदिर के लिए समर्पित रहा, मेरी भी उम्र हो चली है, अब मेरी आंखें अयोध्या में राममंदिर देखने को तरस रही हैं। उन्होंने कहा कि अब तो कोर्ट ने भी कह दिया है यही रामजन्मभूमि है, निर्विवाद हो चुका है कि अयोध्या में रामंमदिर है, मंदिर बनेगा भी। अब समय अनुकूल है। जो मंदिर बनाने की बात करते रहे हैं उनकी भी आजमाईश का समय आ गया है। अब केवल कोर्ट का बहाना बचा है। कोर्ट तो सबूत के आधार पर निर्णय देती है, तो सबूत भी मिल चुके हैं इस आधार पर कोर्ट को जल्द फैसला सुना देना चाहिए।

बाबरी ढांचा ध्वंस के सवाल पर कहा कि उस समय जितने भी लोग मंच पर थे उन्हें कतई पता नहीं था कि ढांचा गिर जायेगा। लालकृष्ण आडवाणी, सिंधिया आदि लोग कारसेवकों को नीचे उतर आने को कह रहे थे, आडवाणी नहीं चाहते थे कि ढांचा गिरे, लेकिन कारसेवक नहीं माने परिणामतः ढांचा विध्वंस हो गया। चलो जो हुआ वह ठीक हुआ, ढांचा विवादित था, और किसी भी विवाद का ध्वंस होना उचित ही है। स्वामी जी नेे कहा कि मुस्लिम समाज भी अयोध्या में रामंमदिर का निर्माण चाहता है, लेकिन कुछ राजनीति करने वाले लोग उन्हें बरगला रहे हैं अड़गा डाल रहे हैं। कोर्ट ने आपसी समझौते का सुझाव दिया है, मुस्लिमों के सद्भाव से यह मामला हल हो जाये तो एक नई इबारत लिखी जायेगी। उन्होंने कहा कि विश्व में बहुत राममंदिर हैं, कई राममंदिर बन भी सकते हैं लेकिन रामजन्मभूमि केवल एक की है वह अयोध्या है।

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