महामारी से टूटा हजारों वर्षों की परंपरा : सत्येंद्र दास

मंदिरों तक सिमटा भगवान श्री राम के जन्मोत्सव श्रद्धालु भी अयोध्या से रहे नदारद

अयोध्या : रामनवमी मेला हजारों वर्षों चलने वाली परंपरागत आयोजन जिस पर आज देश में फैले इस महामारी ने विराम लगा दिया है। यह उत्सव चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ हो जाता है और नवमी तिथि को भगवान श्री राम के जन्म उत्सव के साथ समाप्त होता है। लेकिन यह उत्सव मंदिरों तक ही सिमटकर रह गया है। इस उत्सव में कोई भी भक्त शामिल नहीं हो सकता है। वही माना जा रहा है कि पीएम मोदी के अपील के बाद अब श्रद्धालु भी घरों से बाहर नहीं जाना चाहते है।

राम नगरी अयोध्या में शुक्ल प्रतिपदा 25 मार्च से रामनवमी मेला का आगाज हो गया लेकिन इस मेले में ना ही कोई उत्सव का आयोजन हुआ इस उत्सव में शामिल होने के लिए श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे या उत्सव सिर्फ मंदिरों के गर्भगृह तक ही सिमटकर रह गया 2 अप्रैल को भगवान श्री राम का जन्मोत्सव मंदिरों के गर्भगृह में मनाया जाएगा वही अयोध्या के कनक भवन, व भगवान श्री राम लला जन्मभूमि से लाइव प्रसारण के माध्यम से ही श्रद्धालु भगवान के दर्शन करेंगे। वही अयोध्या के संतों की माने तो पहली बार भगवान श्री राम के जन्म उत्सव का होने वाला भव्य आयोजन को नहीं किया जा सकता है।

आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि सैकड़ों वर्षों में पहली बार राम नवमी उत्सव पर श्रद्धालु भगवान तक नही पहुंच सकेंगे और न ही उनके उत्सव में शामिल हो होंगे। कोरोना के कारण पीएम नरेंद्र मोदी ने जो अपील की उसे आज सभी स्वीकार कर रहे हैं। आज यह कोरोना महामारी पूरे विश्व में व्यप्त है। इसलिए इस वर्ष राम नवमी के उत्सव को भक्त अपने घरों में मनाएंगे । आज यह महामारी भक्तों को उनसे दूर। रखी है। लेेेकिन अगले वर्ष इस उत्सव को बड़े ही धूमधाम से मनाएंगे।

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Satya Prakash
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