2016 में सुलगता रहा मुलायम का आजमगढ़, ऐसे हुई सांप्रदायिक हिंसा   

2016 में सुलगता रहा मुलायम का आजमगढ़, ऐसे हुई सांप्रदायिक हिंसा   

वह दंगा जिसमें सीओ सिटी को लगी गोली, साथ ही आधा दर्जन से अधिक पुलिस वाले घायल हुए...

आजमगढ़. मुलायम का गढ़ इस साल कई बार सुलगा। साल 2016 किसी के लिए अच्छा रहा तो किसी के लिए बुरा पर आजमगढ़ के लिए यह इतिहास का सबसे बुरा साल रहा। इस साल मुलायम का संसदीय क्षेत्र आधा दर्जन से अधिक बार सांप्रदायिक दंगों की आग में सुलगा। सांप्रदायिक वारदातों ने लोगों के जीवन को अस्त-व्यस्त करके रख दिया। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इस दौरान नेट का कनेक्शन तक काट दिया गया था। हिंसों का वह भयावह रूप जिसमें कहीं दोनों तरफ से पत्थरबाजी हुई तो कहीं कई लोग घायल हए वहीं कई को जान गवांनी पड़ी। आजमगढ़ के लोग इस साल के दिए जख्म को शायद ही भूलें। साल के सबसे भयानक हिंसा में सीओ सिटी को भी गोली लगी थी।

होली के दिन फरीदाबाद से हुई शुरूआत

मार्च माह में होली के दिन फरीदाबाद में रंग पोतने को लेकर विवाद शुरू हुआ और हिंसक रूप धारण कर लिया। करीब तीन घंटे पथराव हुआ और पुलिस जीप सहित कई वाहन तोड़े गये। पुलिस पर इस मामले में एकपक्षीय कार्रवाई  का आरोप लगा। 

फूलपुर के भोरमऊ में हुई मौत

फूलपुूर के भोरमऊ राजभर बस्ती और कतरानूरपुर गांव के लोगों के बीच बच्चों के विवाद के चलते दो समुदाय के लोग आपस में भिड़े। इसके बाद एक समुदाय के लोगों ने भोरमऊ नहर के पास हमला कर राजभर बस्ती के एक व्यक्ति को घायल कर दिया बाद में उसकी मौत हो गयी।

22 अप्रैल को मुबारकपुर में हुई हिंसा

दुकान पर अरबी लिखा कागज का प्लेट मिलने के कारण 22 अप्रैल को मुबारकपुर कस्बे में भारी बवाल हुआ। दो दुकान बाइक सहित कई स्थानों पर तोड़फोड़ की गयी। यहां त्वरित कार्रवाई के चलते ममाला थम गया।

3 मई का पवई के रज्जाकपुर व फरीदाबाद में बवाल

तीन मई को नई मस्जिद में माइक लगाने को लेकर पवई थाना क्षेत्र के रज्जाकपुर में भारी बवाल हुआ। यहां भी दो समुदाय के बीच पथराव में कई लोग घायल हुए। वहीं निजामाबाद थाना क्षेत्र के फरीदाबाद में आटो चालक की पिटाई को लेकर दो समुदाय के लोग फिर आमने सामने हो गये। 

12 मई को शहर व फरीदाबाद में स्थित बिगड़ी

12 मई को पूर्वाह्न शहर के कोट मोहल्ले में अरबी लिखी कागज की प्लेट पाई गयी। एक समुदाय के लोग इसे लेकर दुकान पर पहुंच गये और बिवाद बढ़ता इससे पहले शहर कोतवाल ने यह साबित कर दिया कि प्लेट पर धार्मिक बाते नहीं लिखी है। इसी रात को फरीदाबाद में एक दुर्घटना के बाद उपजे विवाद के चलते दो समुदाय के लोग आमने सामने हो गये। इसके बाद यहां पांच थानों की फोर्स तैनात करनी पड़ी। 

14 मई को दाउदपुर में हुआ दंगा

यह दंगा साल का सबसे भयानक दंगा था।12 मई को फरीदाबाद बवाल के बाद पुलिस ने फोर्स तैनात करने का दावा किया। लेकिन इसके बाद भी 14 मई को यहां से दो सौ मीटर की दूरी पर दंगा हुआ। इस दंगे में कई लोग घायल हुए और सीओ सिटी को भी गोली लगी। दंगे पर नियंत्रण के लिए अर्धसैनिक बल बुलाना पड़ा था। एसडीएम निजामाबाद सहित दर्जन भर आरक्षी भी इस दंगे में घायल हुए थे। प्रशासन को तीन दिन के लिए पूरे जिले का मोबाइल नेटवर्क जाम करना पड़ा था।
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