यूपी चुनाव से पहले सभी दलों ने पूर्वांचल में खोले अपने पत्ते...देखें किसका दावा कितना मजबूत

2014 से पहले सपा-बसपा का गढ़ कहा जाता था पूर्वांचल

2014 से अब तक तीन चुनाव जीत बीजेपी ने कायम किया दबदबा

पीएम मोदी वाराणसी तो अखिलेश यादव आजमगढ़ से साधेंगे पूर्वांचल

बसपा ने अति पिछडे वर्ग से आने वाले मऊ के भीम राजभर को प्रदेश अध्यक्ष बना खेला बड़ा दाव

प्रियंका ने अपने कैलेंडर में छह साल की अनाबिया को शामिल कर मुस्लिमों के दिल में उतने की शुरू की कवायद

संकल्प भागीदारी मोर्चा में एआईएमआईएम के शामिल होने से चुनाव का दिलचस्प होना तय

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. यूपी विधानसभा चुनाव में अभी करीब डेढ़ वर्ष का समय है लेेकिन शिवपाल यादव को छोड़ पूर्वांचल में सभी दलों ने अपने पत्ते खोल दिये है। भाजपा अगर पिछड़ों को खुद से जोड़े रहने के लिए जद्दोजहद कर रही है तो बाकी दल अल्पसंख्यक और अति पिछड़ों को पाले में करने की कवायद में जुटे है। चाहे मायातवी हो या फिर अखिलेश और ओवैसी सभी की नजर इन मतदाताओं पर है। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में किसका दाव कारगर होगा यह तो समय बताएगा लेकिन यहां न केवल सियासी सरगर्मी बढ़ गयी है बल्कि चुनाव भी दिलचस्प हो गया है।

यदि देखा जाय तो वर्ष 1990 के बाद से ही पूर्वांचल सपा बसपा का गढ़ रहा है। पूर्वांचल की मदद से ही मुलायम सिंह यादव से लेकर मायावती और अखिलेश तक सत्ता के शिखर तक पहुंचे। अब पूर्वांचल के दम पर ही सीएम योगी सत्ता का सुख भोग रहे है। योगी सरकार के चार साल पूरे होने वाले हैं और अब चर्चा है कि अगली सरकार किसकी होगी। क्योंकि वर्ष 2012 से यूपी के मतदाताओं का ट्रेंड बदला है। उन्होंने खिचड़ी सरकार के बजाय किसी एक दल को बहुमत देने को प्राथमिकता दी है। इसमें पूर्वांचल की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

वर्ष 2017 में बसपा ने पूर्वांचल में बड़ी जीत हासिल की तो मायावती पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में सफल रही। इसके बाद वर्ष 2012 में पूर्वांचल में बड़ी जीत हासिल कर अखिलेश ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनायी। वर्ष 2017 में पूर्वांचल के लोग भाजपा के साथ खड़े हुए पार्टी ने यूपी में प्रचंड बहुमत हासिल किया। अब किसान से लेकर छुट्टा सांड तक का मुद्दा फिजा मेें तैर रहा है। बसपा में नौ साल से सत्ता की दूरी की छटपटाहट है तो सपा चार साल से सत्ता की दूरी बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। वहीं कांग्रेस 31 साल का सूखा खत्म करने के लिए बेचैन है।

सबकी नजर पूर्वांचल की 117 सीटों पर है। जिसमें दस सीट आजमगढ़ की है। सांसद बनने के बाद से ही आजमगढ़ के अनदेखी का आरोप झेल रहे अखिलेश यादव ने जिला मुख्यालय पर कार्यलय के लिए करीब 2 बीघा जमीन खरीद ली है। अखिलेश ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के संचालन का फैसला आजमगढ़ से किया है। सपाइयों का दावा है कि पार्टी मुखिया आजमगढ़ में अपने नए आशियाने से पूरे पूर्वांचल को साधेंगे और बड़ी जीत हासिल करेंगे। वहीं बसपा ने हाल ही में पूर्वांचल के मऊ के रहने वाले भीम राजभर को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बड़ा दाव खेल दिया है। बसपा की नजर सीधे तौर पर अति पिछड़े और मुस्लिम मतदाताओं पर है। वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने आजमगढ़ की अनाबिया को अपने वार्षिक कैलेंडर में शामिल कर मुसलमानों को साधने की पूरी कोशिश की है।

यूपी चुनाव में ओवैसी की भी इंट्री हो चुकी है। आवैसी का दावा भी पूर्वांचल के 15 प्रतिशत से अधिक अल्पसंख्यक मतदाताओं पर है। विपक्ष को पता है कि अगर उन्हें सत्ता हासिल करनी है तो मुस्लिम मतदाताओं का साथ चाहिए। अगर मुस्लिम मतदाता इनके साथ खड़ा होता है और ये कुछ प्रतिशत भी अति पिछड़ों में संेध लगाने में सफल होते हैं तो इनके लिए सत्ता की राह आसान हो जाएगी लेकिन ओवैसी इनके लिए बड़ा खतरा बन गये है।

BY Ran vijay singh

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रफतउद्दीन फरीद
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