वीर अब्दुल हमीद की पत्नी की जगह किसी और महिला को सम्मानित कर चले गये पूर्व सीएम अखिलेश यादव

वीर अब्दुल हमीद की पत्नी की जगह किसी और महिला को सम्मानित कर चले गये पूर्व सीएम अखिलेश यादव
शहीद मेला

Akhilesh Kumar Tripathi | Publish: Sep, 01 2017 04:21:23 PM (IST) Azamgarh, Uttar Pradesh, India

शहीद वीर अब्दुल हमीद के पुत्र जमील अहमद ने भी इस तरह के सम्मान पर काफी आश्चर्य व्यक्त करते हुए शहीद परिवार के साथ मजाक की बात कही है ।

आजमगढ़. देश के लिये अपनी जान देने वाले गाजीपुर के शहीद वीर अब्दुल हमीद के परिवार के साथ भद्दा मजाक किया गया है। मुलायम का गढ़ कहे जाने वाले आजमगढ़ में 30 अगस्त को आयोजित शहीद मेले में पूर्व सीएम अखिलेश यादव की मौजूदगी में परिवार के साथ मजाक हुआ और खुद अखिलेश यादव को इसका अहसास तक नहीं हुआ । समारोह में सम्मान के दौरान न तो अखिलेश यादव शहीद अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीबी को पहचान सके और ना ही सपाई। उनके नाम पर दूसरी महिला को सम्मानित कर जमकर वाहवाही लूटी गयी और जब पोल खुली तो पूरे समारोह पर ही सवाल उठने लगा है।

 



अब चर्चा इस बात की है कि आखिर 33 परिवार जिन्हें शहीद बताकर सम्मानित किया गया उनमें सही कितने है। आयोजक इस ममाले में कुछ बोलने से कन्नी काट रहे है जबकि सपाई उसे दूसरे का कार्यक्रम बताकर। जबकि यही सपाई पूरे कार्यक्रम की मॉनिटरिंग कर रहे थे  और अखिलेश की सपा को सफल बनाने के लिए आधा दर्जन जिलों से कार्यकर्ताओं को एकत्र किया था।

खुद वीर अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीबी भी शहीद मेले में हुए इस कारनामे से हतप्रभ हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अखिलेश यादव उन्हें नहीं पहचानते। वे पूरे दिन घर पर थी। उन्हें समारोह के बारे में पता तक नहीं था। वैसे भी वे कही जाती है तो परिवार के लोगों के साथ जाती है। शहीद अब्दुल हमीद के पौत्र जमील का कहना है कि उन्हे मीडिया के जरिये पता चला कि उनकी दादी को आजमगढ़ में सम्मानित किया गया है। लेकिन जब उन्होंने सम्मानित हो रही महिला को देखा तो आवाक रह गये। वह महिला कोई और थी। उनकी दादी तो परिवार के साथ घर पर मौजूद थी। उन्होंने आयोजकों के इस कृत्य पर नाराजगी भी जताई।

 

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वीर अब्दुल हमीद के समधी आजमगढ़ के जालंधरी निवासी मुनौव्वर इद्रीशी का कहना है कि 30 अगस्त को समारोह में वे खुद मौजूद थे, जब मंच से सम्मान के लिए रसूलन बीबी को बुलाया गया लेकिन वे उस समय स्तब्ध रह गये जब सम्मान दूसरी महिला को पकड़ा दिया गया। इसके बाद मैने वीर अब्दुल हमीद के पोते जमील को फोन किया़। सम्मान के बारे में सुनकर वह भी भौचक रह गया। फिर हमने रसूलन जी से बात की। सच यह था कि उन्हें आमंत्रित ही नहीं किया गया था।

उन्होंने कहा कि वीर अब्दुल हमीद कोई आम आदमी नहीं थे, उन्हें परमवीर चक्र प्रदान किया गया था। यह उनका और शहीद परिवार का अपमान है। दुख की बात यह है कि अखिलेश यादव कई बार रसूलन बीबी से मिल चुके है और अखिलेश सरकार के पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह मंच पर मौजूद थे जो गाजीपुर के रहने वाले है। अगर यह जानबूझ कर नहीं किया गया तो कम से कम उन्हें रसूलन बीबी को पहचानना चाहिए था।


ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि समारोह में जिन 33 शहीदों के परिवारों को सम्मानित किया गया उनमें कितने असली थे। आखिर ऐसा फ्रॉड करने के पीछे आयोजकों का मकसद क्या था। बहरहाल क्षेत्र में इसकी जोरदार चर्चा है।

 

 

BY- RANVIJAY SINGH/ALOK TRIPATHI

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