आजमगढ़ सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगे अर्थी बाबा

आजमगढ़ सीट से चुनावी मैदान में उतरेंगे अर्थी बाबा

Ashish Kumar Shukla | Publish: Apr, 05 2019 07:56:13 PM (IST) Azamgarh, Azamgarh, Uttar Pradesh, India

इस बार महिलाओं की आवाज बनकर खड़े हुए हैं अर्थी बाबा

आजमगढ़. जहां एक ओर कई बड़ी पार्टियों के प्रत्‍याशी अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, तो कुछ चर्चा पाने के लिए नए-नए हथकंडे भी अपना रहे हैं। लेकिन, राजन यादव उर्फ अर्थी बाबा ने इस बार कुछ अलग करने का मन बनाया है। वे इस बार महिलाओं की आवाज बनकर खड़े हुए हैं।

आजमगढ़ से सपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अखिलेश यादव और भाजपा उम्‍मीदवार दिनेश लाल यादव निरहुआ के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे और जीत हासिल करेंगे। कहा कि हम निर्दल प्रत्‍याशी के रूप में इस बार भी लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरेंगे। गले में सेनेटरी पैड की माला पहनकर गोरखपुर से अपने चुनाव अभियान की शुरूआत करने वाले अर्थी बाबा कहते हैं कि अधिकतर महिलाओं को इस बात का ज्ञान नहीं है कि उन्‍हें सेनेटरी पैड का इस्‍तेमाल करना चाहिए. इसलिए वे गले में सेनेटरी पैड की माला पहनकर उन्‍हें जागरूक करने निकले हैं। कहा कि चुनाव जीत गए तो वेतन से मुफ्त में महिलाओं को सेनेटरी पैड बाटेंगे। चुनाव हार गए तो भीख मांगकर उनकी जरूरत को पूरा करेंगे।

ये वही अर्थी बाबा हैं जो साल 2007 में गोरखपुर जनपद के विधानसभा चुनाव में अर्थी पर बैठकर निर्दल प्रत्‍याशी के रूप में पर्चा दाखिल करने रिटर्निंग आफिसर के यहां पहुंचे थे.। हालांकि उन्‍हें चुनाव में जीत हासिल नहीं हुई, लेकिन, वे चर्चा में जरूर आ गए। इसके बाद उन्‍होंने साल 2009 के चुनाव में भी नामांकन अर्थी पर बैठकर दाखिल किया था। उस वक्‍त भी उन्‍होंने मीडिया में खूब सुर्खियां बटोरी थी। साल 2012 के विधानसभा और साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भी वे चुनाव मैदान में कूदे साथ ही साल 2017 के चुनाव में भी वे अर्थी पर बैठकर किस्मत आजमाए लेकिन उन्हे सफलता नहीं मिली। इस बार अखिलेश यादव के खिलाफ आजमगढ़ से चुनावी मैदान में होंगे।

राजन यादव उर्फ अर्थी बाबा ने साल 2001 में एमबीए की डिग्री हासिल की थी। उसके बाद से ही वे लगातार चुनाव में अजब-गजब प्रत्‍याशी के रूप में उतरते रहते हैं। वे प्रधानी से लेकर लोकसभा तक का चुनाव कई बार लड़ चुके हैं. लेकिन, हर बार जीत का दावा करने वाले अर्थी बाबा को अब तक हर बार हार का सामना ही करना पड़ा है. उनका चुनाव कार्यालय हर बार श्‍मशान घाट पर ही होता है।

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