तिहाड़ जैसी होगी आजमगढ़ जेल की सिक्योरिटी, किए गए ये खास इंतजाम

- फुल बाडी स्कैन के बाद ही अंदर जा सकेंगे मुलाकाती
- हाई सिक्योरिटी तरंगों वाला जैमर मोबाइल को बना देगा खिलौना
- जेल में बंद हैं कुंटू, अखंड जैसे कई बड़े अपराधी
- जेल से गिरोह के संचालन के लगते रहे हैं आरोप
- पूर्व में जेलर की हो चुकी है हत्या, हाल में आरक्षी को मारी गई थी गोली

By: Hariom Dwivedi

Updated: 25 Mar 2020, 05:57 AM IST

आजमगढ़. अब अपराधी न तो जेल से गिरोह का संचालन कर सकेंगे और न ही मोबाइल पर बात होगी। यही नहीं बंदियों से मिलने जाने वाले भी उन्हें किसी तरह की अवैध सामाग्री नहीं दे सकेंगे। कारण कि अब जिला कारागार में तिहाड़ जेल जैसा सिक्योरिटी सिस्टम लगाया जा रहा है। अब सिर्फ गेट पर ही नहीं बल्कि मेटर डिटेक्टर से गुजरते हुए फुल बाड़ी स्कैन कराने के बाद ही कोई मुलाकाती अंदर प्रवेश कर पाएगा। यह व्यवस्था पेशी पर जाने वाले बंदियों पर लागू होगी। यहीं नहीं मोबाइल को खिलौना बनाने के लिए हाई तरंगों वाला जैमर लगाया जा रहा है। सब मिलाकर बंदियों को अभेद्य सुरक्षा चक्रव्यूह में रखा जाएगा। जेल प्रशासन का दावा है कि तिहरा सुरक्षा घेरा बनने बाद अपराधी किसी तरह की गतिविध को अंजाम नहीं दे पाएंगे। इसके लिए शासन ने 2.75 करोड़ का बजट जारी कर दिया है।

आजमगढ़ हमेशा से संवेदनशील जिला रहा है। वर्ष 2005 में यहां जेल के बगल स्थित आवास के सामने जेलर दीप सागर की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी। जेल में बंद अपराधियों द्वारा रंगदारी मांगना तो यहां आम बात है। वर्ष 2019 में जेल पर चढ़कर अपराधियों ने एक आरक्षी को आवास में घुसकर गोली मार दिया है। वहीं पिछले वर्ष ही यहां से तीन अपराधी भागने में सफल रहे थे।
इटौरा में बने जेल की क्षमता 1244 बंदियों की है। इनकी निगरानी के लिए 252 बंदी रक्षक चाहिए, जबकि तैनाती 42 की है। जेल मैनुअल मुताबिक सात बंदियों पर एक बंदी रक्षक होना चाहिए। पुराने नियतन से 14 पुरुष व सात महिला जेल वार्डन कम हैं। इसी तरह एक कारापाल व दो उप कारापाल के पद भी खाली है। रहा सवाल बंदियों का तो वर्तमान में 1350 बंदी यहां निरुद्ध हैं जो क्षमता से अधिक है। जेल में ध्रुव कुमार सिंह कुंटू, अखंड प्रताप सिंह, पूर्व मंत्री अंगद यादव, मेरठ का उधम सिंह सहित कई बड़े अपराधी बंद है।
जेल से गिरोह के संचालन और मोबाइल के उपयोग को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। प्रशासन यहां से कई बार मोबाइल सहित अन्य अवैध सामाग्री बरामद कर चुका है। पिछले दिनों एक दवा व्यवसायी से रंगदारी भी मांगी गयी थी। वहीं अपराधियों के भागने का खतरा बना रहता है। अपराधियों के पास मोबाइल व अन्य समान कैसे पहुंचता है, इसका पता जेल प्रशासन आज तक नहीं लगा सका है। इसलिए यहां की जेल को हाई सिक्योरिटी जेल में तब्दील करने का फैसला किया गया है।

नई व्यवस्था में जिला कारागार की सुरक्षा घेरा त्रिस्तरीय होगा। जेल के मुख्य गेट के बाहर पुलिस तलाशी लेगी। उसके बाद स्कैनर बैगेज, फूल बाडी स्कैनर से गुजरना होगा। डोर मेटल डिटेक्टर से गुजरने के बाद बंदी रक्षक तलाशी लेंगे। इसके अलावा पग-पग पर लगे पांच मेगा पिक्सल के सीसीटीवी कैमरे प्रत्येक गतिविधियों को कैमरे में कैद करेंगे। खुफिया कैमरों की वजह से नियमों की अनदेखी करने वाले आसानी से पकड़ में आ जाएगे। जेल के मुख्य द्वार से लेकर अंदर हाते तक सीसी रोड का निर्माण किया जाएगा। इसके पीछे मंशा चारो पहर बाइक से पेट्रोलिग कराने की है। कुख्यात अपराधी उच्च सुरक्षा बैरक में रखे जाएंगे।

इसके अलावा मोबाइल का उपयोग रोकने के लिए हाई लेजर उच्च क्षमता के जैमर लगाए जाएंगे। यह जैमर फोर जी सिस्टम वाले मोबाइल पर भी भारी पड़ेंगे। फिलहाल टू व थ्री जी क्षमता वाले सिस्टम को जाम करने वाले ही जैमर जेलों में लगाए जाते हैं। साथ ही यह भी प्रयास किया जा रहा है कि बंदियों की संख्या बढ़ाई जाय। जेल अधीक्षक राधाकृष्ण मिश्र का कहना है कि बंदियों के पास से मोबाइल बरामद होने, गुटबाजी व तानाशाही के मामले सामने आने से फजीहत होती थी। जेल की सुरक्षा हाई सिक्योरिटी कर दिये जाने के बाद से ऐसे मामलों में रोक लगेगी। वहीं बाहर से आने वाले मुलाकाती भी अपने साथ कोई अवैध वस्तु छिपाकर नहीं ला पाएंगे और ना ही पेशी से आने वाले बंदी रास्ते में कोई सामान लेकर जेल में प्रवेश कर सकेंगे।

Hariom Dwivedi
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