आजमगढ़ डबल मर्डरः अगर पुलिस ने दिखाई होती गंभीरता तो नहीं होती इतनी बड़ी वारदात

  • अशमर ने लगाई थी जान माल के सुरक्षा की गुहार लेकिन पुलिस ने नहीं दिया ध्यान
  • आरोपी पक्ष को थी आशंका कि फर्जी टिकट मामले में अशमर ने की है मुखबिरी
  • फर्जी ढंग से टिकट बनाने में हाल में ही मोहम्मद आरिफ को पुलिस ने किया था गिरफ्तार
  • दोहरे हत्याकांड में आरोपी पक्ष की पांच महिलाओं को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है पुलिस

आजमगढ़. काश पुलिस लापरवाह न होती और अशमर की गुहार सुनकर सुरक्षा देने के साथी कार्रवाई करती तो आज निजामाबाद थाना क्षेत्र के चकिया हुसैनाबाद में दोहरा हत्याकांड न होता। फर्जी ढंग से रेलवे टिकट बनाने के मामले में आरिफ उर्फ मुन्ना की गिरफ्तारी के बाद से ही अशमर को धमकियां मिल रही थी। आरोपी पक्ष को शक था कि अशमर की मुखबिरी की वजह से ही मुन्ना को जेल जाना पड़ा। मुन्ना के बेटे ने फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट तक किये लेकिन पुलिस मौन रही। खुद अशमर ने पुलिस से लिखित और मौखिक शिकायत कर जानमाल की सुरक्षा की गुहार लगाई। खुद की जिंदगी बचाने के लिए लखनऊ तक भागा लेकिन वह अपनी जान नहीं बचा सका। यही वजह है कि इस दोहरे हत्याकांड के बाद लोगों में आरोपियों से अधिक गुस्सा पुलिस के खिलाफ है। बहरहाल अब पुलिस ने आरोपी पक्ष की पांच महिलाओं को हिरासत में ले पूछताछ कर रही है। गांव में कई थानों की फोर्स भी तैनात है।

 

बता दें कि निजामाबाद थाना क्षेत्र के चकिया हुसैनाबाद गांव निवासी अशमर व मोहम्मद आरिफ उर्फ मुन्ना के बीच पुरानी रंजिश चल रही है। आरिफ उर्फ मुन्ना की फरिहां बाजार स्थित दुकान पर लगभग एक माह पूर्व पुलिस ने छापेमारी की थी। छापे के दौरान रेलवे का फर्जी टिकट बरामद किया था। फर्जी टिकट बनाने के आरोप में आरिफ उर्फ मुन्ना को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। आज ीाी वह जेल में बंद है।

 

आरिफ उर्फ मुन्ना के पुत्र मोहम्मद वासिफ को संदेह था कि अशमर पक्ष के लोगों ने मुखबिरी कराई जिसकी वजह से उसका पिता गिरफ्तार हुआ। इससे दोनों पक्षों में रंजिश और बढ़ गई थी। अशमर पक्ष के लोगों की माने तो मोहम्मद वासिफ ने फर्जी आइडी बनाकर फेसबुक पर कुछ आपत्तिजनक फोटो भी अपलोड कर दिया था। उसके बाद दोनों पक्षों में एक नया विवाद शुरू हो गया था।

 

अशमर के परिवार के लोगों के मुताबिक विरोधी पक्ष के लोग अशमर की हत्या की फिराक में लगे थे। उनके इरादे को भांप अशमर लखनऊ चला गया था। इसके बाद भी उसे धमकियां मिल रही थीं। लखनऊ से ही अशमर ने 21 सितंबर को निजामाबाद थानाध्यक्ष एवं पुलिस अधीक्षक को रजिस्टर्ड डाक से प्रार्थना पत्र भेजकर हत्या की आशंका जताते हुए सुरक्षा की गुहार लगाई थी लेकिन पुलिस ने ध्यान नहीं दिया।

 

अशमर घर आने के बाद भी थानेदार से सुरक्षा मांगी लेकिन नहीं मिली। आखिरकार सोमवार को अशमर और उसके साथी की हत्या हो गयी जबकि एक युवक जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। हत्या के बाद पुलिस की नींद टूट गयी है। गांव में भारी संख्या में फोर्स तैनात कर दी गयी है। आरोपी फरार हैं। उनपर दबाव बनाने के लिए पुलिस ने पांच महिलाओं को हिरासत में ले रखा है।

 

खासबात है कि हत्या के बाद जिस तरह से पोस्टमार्टम हाउस पर भी दोनों पक्ष के लोग आपस में भिड़ गए। उससे साफ है कि तनाव अभी कम नहीं हुआ है। यहां भी पुलिस को तीन लोगों को हिरासत में लेना पड़ा। जिस तरह का तनाव है आशंका जताई जा रही है कि फिर दोनों पक्ष आमने सामने हो सकते हैं। वहीं अपर पुलिस अधीक्षक नगर पंकज पांडेय की माने तो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। उनके घर पर छापेमारी कर पांच महिलाओं को हिरासत में लेकर उनके बारे में पूछताछ की जा रही है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

BY Ran vijay singh

रफतउद्दीन फरीद
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned