समाजवादियों के गढ़ में सीएम योगी के मिशन को उन्हीं के नौकरशाहों ने किया फेल

- विकास की रैकिंग में टाप-50 से बाहर हुआ अखिलेश का संसदीय क्षेत्र
- बलिया रैकिंग में है आखिरी से नंबर वन, तो मऊ 57वें स्थान पर

By: Hariom Dwivedi

Updated: 14 Mar 2020, 06:01 PM IST

रणविजय सिंह
आजमगढ़. यूपी की सत्ता में आने के बाद सीएम योगी ने आजमगढ़ मंडल में समाजवादियों के वर्चस्व को तोड़ने के लिए इसे शीर्ष प्राथमिकता वाले क्षेत्र में चुना था, लेकिन सरकार न तो समाजवादियों के गढ़ में सेंध लगा सकी और न ही विकास कार्यो केा आगे बढ़ा पाई। ऐसा भी नहीं है कि यहां सरकार की योजनाएं लागू नहीं हैं। योजनाएं तमाम हैं, लेकिन नौकरशाहों ने सरकार के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। आपरेशन कायाकल्प जिसके जरिये विद्यालय से लेकर एएनएम सेंटर तक का निर्माण होना है इसमें मंडल का बलिया जिला नीचे से पहले पायदान पर है तो अखिलेश यादव का संसदीय क्षेत्र आजमगढ 53 व मऊ 65 पायदान पर खड़ा है। इसके बाद भी सरकार से लेकर अधिकारी तक विकास के बड़े बड़े दावे कर रहे हैं। हकीकत जमीन पर देखी जा सकती है। खुद शासन ने ही यह रैंकिंग जारी की है।

दिग्गजों का गढ़ रहा आजमगढ़
आजमगढ़ मंडल पूर्वांचल के सर्वाधित पिछड़े क्षेत्रों में से एक है। यह अलग बात है कि इस क्षेत्र ने प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक दिया, लेकिन अपेक्षित विकास आज तक नहीं हो पाया। यह क्षेत्र समाजवादियों का गढ़ भी कहा जाता है। बलिया पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का गृह क्षेत्र था तो आजमगढ़ पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव व पूर्व केंद्रिय मंत्री चंद्रजीत यादव का गढ़ कहा जाता था। कभी डा. राम मनोहर लोहिया, चौधरी चरण सिंह और राजनारायण जैसे नेताओं ने इसे अपना कार्य क्षेत्र बनाया था। पिछले दो दशक से यहां सपा-बसपा राज कर रही है। खुद पूर्व रक्षामंत्री मुलायम सिंह यादव यहां से सांसद रहे तो वर्तमान सांसद अखिलेश यादव हैं। फिर भी यह विकास की दौड़ में अन्य मंडल मुख्यालयों की अपेक्षा काफी पीछे है।

वर्ष 2017 में जब बीजेपी ने यूपी में प्रचंड बहुमत की सरकार बनायी और पूर्वांचल के ही योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तो लोगों में उम्मीद जागी कि शायद अब तस्वीर बदले। कारण कि योगी का आजमगढ़ से गहरा नाता रहा है। यहीं नहीं सीएम बनने के बाद उन्होंने मंच से कहा कि आजमगढ़ मंडल उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है और यहां के लोगों को वह सब मिलेगा जो पिछले सत्तर सालों में नहीं मिला और वे जिसके हकदार है, लेकिन तीन साल में बड़ी योजना के नाम पर सीएम ने आजमगढ़ में सिर्फ एक विश्वविद्यालय दिया जिसका निर्माण अभी शुरू नहीं हुआ है। अन्य योजनाएं जो सामान्य रूप से सभी जिलों में चल रही हैं उनका भी हाल यहां बदतर है।

क्या कहती है रिपोर्ट
हाल में आयी एक रिपोर्ट के मुताबिक, आजमगढ़ मंडल अभी डिजिटल सिग्नेचर की सही व्यवस्था नहीं कर सका है। उप निदेशक पंचायत ने मुताबिक, इस मामले में राज्य स्तर पर आजमगढ़ 48वें, मऊ 49वें एवं बलिया 54वें स्थान पर है। कायाकल्प योजना का हाल तो और भी बुरा है। इस योजना के तहत पंचायत भवन का अनुरक्षण, प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों, आगनबाड़ी केन्द्रों, एएनएम सेन्टरों, शासकीय विद्यालयों में शौचालय का निर्माण का कार्य कराया जाना हैं। इसमें राज्य स्तर की रैंकिंग में आजमगढ़ 53वें, मऊ 65वें एवं बलिया 75वें स्थान पर है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार और नौकरशाह योजनाओं को लेकर कितने गंभीर हैं।

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