पुलिस के लचर रवैये से हुआ आजमगढ़ में दंगा

 पुलिस के लचर रवैये से हुआ आजमगढ़ में दंगा
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Ashish Kumar Shukla | Publish: Mar, 25 2016 05:09:00 PM (IST) Azamgarh, Uttar Pradesh, India

पुलिस सतर्क होती तो दीदारगंज में भी नहीं होता बवाल

आजमगढ़. पुलिस जिम्मेदारियों के प्रति कितनी गंभीर है और सत्ता के दबाव में कितनी वेवश यह होली पर्व पर दो दिन के बीच साफ हो गया। अगर जिले की पुलिस चौकन्नी होती तो न रौनापार में गोली बारी हो और ना ही निजामाबाद के फरीदाबाद में सांप्रदायिक दंगा होता। यहीं नहीं दीदारगंज क्षेत्र में हुए बवाल के पीछे भी पुलिस की लापरावही रही। दीदारगंज और फरीदाबाद के मामले में पुलिस अधिकारियों के निर्णय क्षमता पर भी सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। यदि डीएम की तरह पुलिस के अधिकारी त्वरित फैसला करते तो वह हालात नहीं होता जो देखने को मिला। 

फरीदाबाद की घटना को ही ले यहां मुस्लिम महिलाओं पर रंग पड़ने को लेकर विवाद शुरू हुआ लेकिन तीन किमी से पुलिस पहुंचने में घंटे भर लग गये। बीट के सिपाही पर खास लोगों को सह देने का आरोप लगा। यहीं नहीं करीब चार घंट बवाल चला लेकिन पुलिस की भूमिका मूक दर्शक से अधिक नहीं रही। दोनों गुटों के बीच करीब पांच सौ मीटर की दूरी थी और वहीं से लोग दौड़कर पथराव कर रहे थे पुलिस बीच में पत्थर समेटने के लिए खड़ी थी और खुद को बचा रही थी। आधा दर्जन थाने के लोग मौके पर मौजूद है लेंकिन यह दोनों पक्षों से बातचीत का प्रयास तब शुरू हुआ जब एसपी पहुंचे। 

यहीं नहीं यदि पुलिस अधीक्षक तत्काल एसओ और सिपाही के खिलाफ कार्रवाई कर देते तब भी मामला शांत हो जाता लेकिन यहां कोशिश उपद्रव रोकने से अधिक मातहतों को बचाने की होती रही। जब डीएम पहुंचे तो उन्होंने तत्काल एसओ के खिलाफ कार्रवाई की और मामला शांत हो गया। बात करें रौनापार के बनकटा बाजार में हुए विवाद की तो यहां गोलीबारी की वजह डीजे रहा। पुलिस अधिकारी एक महीने पहले से बैठक कर यह दावा कर रहे थे कि कहीं डीजे नहीं बजेगा लेकिन पूरे जिले में डीजे पर लोग थिरकते रहे। 

यहां भी विवाद शुरू होने के घंटे भर बाद पुलिस पहंची और परिणाम रहा कि छह लोग गोली लगने से घायल हुए और एक की मौत हो गयी। इतने के बाद भी बुधवार को न तो शराब की दुकानें बंद करायी गयी और ना ही डीजे पर लगाम कसी गयी। यहां तक कि गुरूवार को भी चोरी छिपे शराब ठेकों से बिकती रही। दीदारगंज थाना क्षेत्र के अमृतगंज बाजार में तो हद ही हो गयी। यहीं दो गुटो के बीच वर्चश्व की लड़ाई लंबे समय से चल रही थी। होलिका दहन के दिन दोनों गुटो में मारीपीट हुई थी। इसके बाद गुरूवार की दोपहर भी बाजार में दोनों पक्ष आपस में मिड़े थे। 

उस समय पुलिस भी वहां मौजूद थी लेकिन न तो गांव में सुरक्षा की व्यवस्था की गयी और ना ही बाजार में परिणाम रहा कि शाम को पूर्व प्रधान ने वर्तमान प्रधान के धोखे में एक अन्य युवक का धक्का मार दिया। इसके बाद बाजार में तनाव फैल गया। पूर्व प्रधान की बोलेरो तोड़ी गयी ।इन तीनों मामलों में पुलिस ने अब तक एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है। तनाव अब भी बरकरार है। यदि पुलिस सर्तक होती तो शायद इसमें से एक भी घटना घटित नहीं होती। 
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