सब्जियों की कीमतों में भारी इजाफा, हरे मिर्च की कीमत सुनेंगे तो रह जाएंगे दंग

—कोरोना बीच महंगाई का तड़का, सब्जी से लेकर तेल तक गरीबों की पहुंच से बाहर
—धनिया और हरे मिर्च की बढ़ी कीमतों ने थाली से दूर की चटनी
—मौसम की मार से कड़वा हुए करैला तो टमाटर पर भी चढ़ा रंग
—आलू ने तोड़ा लाक डाउन का भी रिकार्ड बिक रहा 38 से 40 रुपये किलो
—तेल, दाल व चावल के दाम में भी अच्छी खासी बढोत्तरी
—धान का उत्पादन घटना तो नियंत्रण के बाहर हो जाएगी महंगाई

By: Mahendra Pratap

Published: 07 Aug 2020, 06:05 PM IST

आजमगढ़. कोरोना महामारी में छिने रोजागार और भारी वर्षा से हुए नुकसान से लोग आर्थिक तंगी के शिकार है। चाहे मध्यमवर्गीय परिवार हो अथवा मजदूर तबका सभी के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ मुश्किल हो गया है। ऐसे में मंहगाई का तड़का अब लोगों को भारी पड़ रहा है। आमतौर पर अधिकतम दस रुपये किलो बिकने वाला आलू इस समय 38 से चालीस रुपये किलो बिक रहा है। वही हरी धनिया और मिर्च तो सारे रिकार्ड ही ध्वस्त कर दिये है। हालत यह है कि थाली से चटनी तक गायब हो गयी है। जब देश में लाक डाउन शुरू हुआ था और आयात लगभग ठप था उस समय भी महंगाई इस स्तर तक नहीं बढ़ी थी।

खास बात यह है कि आगे भी मंहगाई कम होने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। कारण कि भारी वर्षा ने धान की फसल को 20 प्रतिशत तक बर्बाद कर दिया है। वहीं सब्जी की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में उत्पादन घटना तय है और उत्पादन घटेगा तो महंगाई को रोक पाना मुश्किल हो होगा, जिससे आम आदमी सहमा हुआ है।

कम उत्पादन से मुनाफा नहीं कमा रहा है किसान :- पूर्वांचल में 80 प्रतिशत से अधिक लोग खेती, मजदूरी अथवा प्राइवेट नौकरी पर निर्भर है। कोरोना संक्रमण के चलते देश में लगे लॉकडाउन में केवल आजमगढ़ में 1.37 लाख प्रवासी मजदूरों को नौकरी छोड़ वापस घर लौटना पड़ा। जो वापस नहीं लौटे कंपनी उन्हें पूरा वेतन नहीं दे पा रही है। जो घर है उनके पास रोजगार नहीं है। बात करें खेती की तो रबी की फलस में तूफान व ओलावृष्टि से तिलहनी, दलहनी व गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ था। उत्पादन कम होने के कारण किसान मुनाफा नहीं कमा पाया।

महंगाई चरम पर :- खरीफ से उम्मीद थी लेकिन लगातार बरसात के कारण दलहनी फसल अरहर मूंग, उर्द की बुआई नहीं हो पाई तो बाजरा, मक्का का हाल भी कुछ ऐसा है। अधिक वर्षा के कारण धान की फसल 20 प्रतिशत तक गल कर बर्बाद हो गयी है। सब्जी को भी भारी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में इस फसल में भी किसानों को आर्थिक चोट पहुंचनी तय है। इनके पास आमदनी का कोई जरिया नहीं है लेकिन महंगाई चरम पर पहुंचती दिख रही है।

दाल का मूल्य और बढ़ना तय :- अरहर की दाल 95 से 100 रुपये किलो बिक रही है। वहीं सरसों तेल 120 रुपया लीटर हो गया है। अरहर का उत्पादन न होने पर दाल का मूल्य और बढ़ना तय है। सब्जी की बात करें तो वह गरीबों की थाली से दूर हो चुकी है। आमतौर पर बुआई के सीजन में 15 रुपये किलो तक बिकने वाला आलू आज एक सप्ताह से 38 से 40 रुपये किलो बिक रहा है। अन्य सब्जियों की बात करे तो बैगन 45 रुपये प्रति किलो, प्याज रुपये प्रति किलो, हरा मिर्चा 100 रुपये प्रति किलो, हरी धनिया 250 रुपये प्रति किलो, टमाटर 80 रूपये प्रति किलो, लौकी 30 रुपये प्रति किलो, पलुरू 20 रुपये प्रति किलो, कोहड़ा 20 रुपये प्रति किलो, सूरन 50 रुपये प्रति किलो, परवल 80 रुपये प्रति किलो, भिंडी 25 रुपये प्रति किलो, बोड़ो 40 रुपये प्रति किलो, मशरूम 270 से 300 रुपये किलो, करैली 50 रुपये प्रति किलो बिक रही है।

बरसात हुई तो और बढ़ सकता है रेट :- इसी तरह मसाला, चावल, मेवा, दही, पनीर के मूल्य में भी काफी बढ़ोत्तरी हुई है। यहां तक कि कानपुर से आने वाला चलानी खोया 400 रुपये किलो मिल रहा है। सब मिलाकर लॉकडाउन शुरू होने के समय जब आयात बंद था उस समय भी इस तरह की महंगाई देखने को नहीं मिली थी। सब्जी कारोबारी मिथिलेश मौर्य, धनश्याम मौर्य, राजेश कुमार, चंद्रजीत आदि का कहना है कि सब्जी का उत्पादन कम होने के कारण इसके मूल्य में इजाफा हो रहा है। अगर बरसात का यही हाल रहा तो आगे इसमें और वृद्धि हो सकती है। कारण कि बाढ़ के कारण बाहर से भी सब्जियां कम आ रही है। अगर थोक रेट अधिक होगा तो खुदरा महंगाई बढ़नी ही है।

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