इस लोकसभा सीट पर बीजेपी को मिली तीन दशक की सबसे बड़ी हार, सांसद को नहीं मिला दोबारा मौका

इस लोकसभा सीट पर बीजेपी को मिली तीन दशक की सबसे बड़ी हार, सांसद को नहीं मिला दोबारा मौका
लालगंज लोकसभा सीट

Akhilesh Kumar Tripathi | Updated: 26 May 2019, 02:50:10 PM (IST) Azamgarh, Azamgarh, Uttar Pradesh, India

1996 से 2009 तक बारी बारी जीतती रही हैं सपा और बसपा, 2014 में पहली बार खुला था बीजेपी का खाता

आजमगढ़. लोकसभा चुनाव में जहां बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई, वहीं कुछ परिणाम बीजेपी के लिये चौंकाने वाले रहे। यूपी की लालगंज लोकसभा सीट पर लोगों ने मिजाज बदला नहीं बल्कि यहां के लोगों ने तीन दशक की सबसे बड़ी हार बीजेपी की झोली में डाल दी। इसके साथ ही वर्ष 1996 के चुनाव से यहां हर बार सांसद बदलने का ट्रेंड भी कायम रहा। यह नए सांसद के लिए भी बड़ा संदेश है कि उन्हें जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा।


बता दें कि लालगंज संसदीय सीट वर्ष 1962 में अस्तित्व में आयी थी। पीएसपी के विश्राम प्रसाद प्रथम सांसद चुने गए थे। इसके बाद 1967, 1971, 1977 के चुनाव में रामधन ने लगातार जीत हासिल की। इस सीट पर वे पहली हैट्रिक लगाने वाले सांसद बने। वर्ष 1980 के चुनाव में समाजवादी जनता पार्टी के छांगुर राम ने रामधन को पराजित कर सांसद बने। इसके बाद 1984 में रामधन ने कांग्रेस व 1989 में रामधन ने जनता दल के टिकट पर जीत हासिल की। वर्ष 1991 में जनता दल के रामबदन ने जीत हासिल की। रामधन इस सीट से सर्वाधिक पांच बार सांसद चुने गए।


वर्ष 1999 के चुनाव से ही यहां के लोगों का मिजाज बदला और मतदाता अपने हित को लेकर जागरूक दिया। यहीं वजह है कि वर्ष 1989 के बाद कुछ मांगें हर चुनाव में उठती रही और उन्ही को लेकर मतदान हुए। यह अलग बात है कि जनता की उस मांग को किसी ने पूरा नहीं किया और जनता भी चुनाव दर चुनाव सांसद बदलती गयी। वर्ष 1996 में पहली बार यहां बसपा का खाता खुला और डा. बलिराम यादव सांसद चुने गए लेकिन वे भी जनता का विश्वास नहीं जीत पाए और 1998 में लोगों ने सांसद बदला और सपा के दरोगा सरोज को चुनाव में जीत दिला दी।

 

वर्ष 1999 के चुनाव में एक बार फिर यहां के लोगों ने बसपा के बलिराम यादव को मौका दिया लेकिन 2004 में लोगों ने फिर दरोगा सरोज को आजमाया लेकिन वे फिर जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे तो वर्ष 2009 में फिर बसपा के डॉ. बलिराम को जिता दिया। वर्ष 2014 की मोदी लहर में पहली बार यहां बीजेपी का खाता खुला नीलम सोनकर सांसद चुने गए।


2014 के चुनाव में नीलम ने वाराणसी लालगंज आजमगढ़ वाया गोरखपुर नई रेल लाइन, सब्जी मंडी, रोडवेज के निर्माण का वादा कर जनता के दिल में उतरी थी। पांच साल में वह भी इन वादों को पूरा नहीं कर सकी। इससे जनता में नाराजगी साफ दिखी और वर्ष 2019 के चुनाव में नीलम को हराकर बसपा की संगीता आजाद की सिर जीत का सेहरा बांध दिया। संगीता आजाद ने भाजपा की प्रत्याशी व सांसद नीलम सोनकर को 1,61,597 मतों से हराया । सपा बसपा गठबंधन की प्रत्‍याशी संगीता आजाद को कुल 5,18,820 मत मिले जबकि भाजपा की नीलम सोनकर को 3,57,223 मत मिले।

 

BY- RANVIJAY SINGH

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned