सपा का वर्चस्व खत्म करने के लिए ये बाहुबली बन रहा भाजपा की बड़ी ताकत, कई जिले के लोग दे रहे साथ!

सपा का वर्चस्व खत्म करने के लिए ये बाहुबली बन रहा भाजपा की बड़ी ताकत, कई जिले के लोग दे रहे साथ!

Ashish Shukla | Publish: Sep, 11 2018 02:06:04 PM (IST) Azamgarh, Uttar Pradesh, India

आजमगढ़ मंडल से बड़ी संख्या में लोगों को किया जा रहा है आमंत्रित

आजमगढ़. पिछले तीन दशक से यादव मुलायम सिंह यादव के साथ खड़ा है। बसपा मुखिया मायावती का सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाया व पीएम मोदी का सबका साथ सबका विकास का नारा भी इन पर प्रभाव नहीं डाल सका। यादव समाज के लाग पूरी ताकत के साथ सपा के साथ खड़े रहे। अब शिवपाल के सपा से अलग होने और सेक्युलर मोर्चा के गठन करने के बाद बीजेपी को मौका मिल गया है और वह यादवों पर सपा के एकाधिकार को तोड़कर अपने पाले में करने के लिए बेचैन है। लोकसभा चुनाव से पहले यादवों के बीच सेंध लगाने के लिए बीजेपी 15 सितंबर को लखनऊ में यादव सम्मेलन करने जा रही है। इस सम्मेलन में आजमगढ़ व आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए डिप्टी सीएम व आजमगढ़ के प्रभारी मंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा यूवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष यदुवंशी को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी मिशन 2019 की तैयारी में जोरशोर से लगी है। यूपी में समाजवादी पार्टी के साथ बहुजन समाज पार्टी की काट खोजने के लिए लगातार ओबीसी सम्मेलन कर रही है। अब 15 सितंबर को भाजपा सपा के मूल वोटबैंक में सेंधमारी के लिए यादव सम्मेलन करने जा रही है। माना जा रहा है कि बीजेपी इस कार्यक्रम के बहाने यादव समुदाय के लोगों का दिल जीतना चाहती है।

भाजपा ने यादव समुदाय से आने वाले कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को इस सम्मेलन के लिए खासतौर पर तैयारी करने को कहा है। बूथ लेवल से लेकर प्रदेश स्तर तक के यादव जाति के कार्यकर्ताओं को लखनऊ के सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए कहा गया है। हाल में आजमगढ़ आये यूवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष यदुवंशी ने कार्यक्रम की तैयारियों के लिए यादव नेताओं से लंबी वार्ता की।
वैसे भी बीजेपी में यादव नेताओं की लगातार कमी रही है। आजमगढ़ जिले की बात करें तो पार्टी में बाहुबली रमाकांत यादव जैसा कद्दावर नेता है।

जिसकी न केवल यादवों में गहरी पैठ है बल्कि अपना वोट बैंक भी है। रमाकांत वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा का गढ़ कहे जाने वाले इस जिले में पार्टी को जीत दिला चुके है। वर्ष 2019 में भी पार्टी को रमाकांत यादव से काफी उम्मीदे है। कारण कि रमाकांत ही ऐसे नेता है जो सपा के यादव नेताओं को तोड़कर बीजेपी के पाले में ला सकते हैं जैसा कि उन्होंने 2009 व 2012 के चुनाव के पूर्व किया था। इसके अलावा बीजेपी में उभरता हुआ यादव चेहरा पूर्व महामंत्री बृजेश यादव है। इसे काफी सक्रिय नेताओं में गिना जाता है लेकिन पहला मौका है जब उन्हें जिलाध्यक्ष द्वारा अपनी टीम में शामिल नहीं किया गया है। बड़ी संख्या में लोग इसकी मुख्य वजह यादव होना मान रहे हैं लेकिन पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को इस सम्मेलन को लेकर बृजेश से काफी उम्मीदें है।

कारण कि यादव समुदाय पर सपा की मजबूत पकड़ होने के चलते भाजपा को इस बिरादरी का वोट बेहद कम मिलता रहा है। उत्तर प्रदेश में करीब आठ फीसदी यादव वोट है और पिछड़ी जाति में इनकी लगभग 20 फीसदी हिस्सेदारी है। 2014 का आम चुनाव हो या फिर 2017 का विधानसभा चुनाव, आंकड़ों को देखा जाए तो यादव मतदाताओं की बड़ी आबादी ने समाजवादी पार्टी को वोट किया था। भाजपा के साथ ही इस वर्ग का वोट बसपा को भी काफी कम मिलता है। प्रदेश के बदलते समीकरण में भाजपा यादव समुदाय के लोगों को लुभाने की कोशिश कर रही है।

समाजवादी पार्टी में अखिलेश यादव और शिवपाल यादव की राहें जुदा होने से भाजपा अब इस मौके को भी काफी जोर से भुनाने की जुगत में लगी है। शिवपाल ने सेक्युलर मोर्चा बना लिया है और 80 सीटों पर प्रत्याशी उतारने की बात कर रहे हैं। ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि यादव वोट के बंटवारे में वह लाभ लेने की अच्छी स्थिति में है। यही वजह है कि पार्टी ने तत्काल यादव सम्मेलन का फैसला कर लिया।

भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष यदुवंशी ने बताया कि 15 सितंबर का सम्मेलन भी हमारे पिछड़े जातियों के सम्मेलन का ही एक हिस्सा है। इसको यादव सम्मेलन नहीं कहना चाहिए। भाजपा किसी जाति विशेष का सम्मेलन नहीं करती, लेकिन यह सच है कि 15 सितंबर को हमारे यादव और उससे मिलती जुलती जाति के जो लोग पार्टी के पदों पर हैं। उन्हें इस कार्यक्रम में बुलाया गया है। पूर्व महामंत्री बृजेश यादव का कहना है कि यह सम्मेलन काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। हमने हमेसा सबकों साथ लेकर चलने का प्रयास किया है। यह उसी प्रयास की एक कड़ी है। वैसे बीजेपी के यादव सम्मेलन पर विपक्ष खासतौर पर सपा की भी नजर है।

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