सम्मान के जरिये समीकरण साधने में जुटी बीजेपी, लेकिन आसान नहीं है 2022 की राह

पंचायत चुनाव के बाद जीते हुए प्रतिनिधियोें के सम्मान में जरिये भाजपा न केवल गांव में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है बल्कि विरोधियों के वोट बैंक में सेंध लगानेे की पूरी कोशिश कर रही है लेकिन महंगाई और दलित उत्पीड़न के मुद्दे को विपक्ष जिस तरह से भुनाने में जुटा है और बीजेपी के अदर दलित नेता जिस तरह पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं उससे पार्टी की राह 2022 में कठिन होती दिख रही है।

By: Ranvijay Singh

Updated: 01 Aug 2021, 03:49 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. यूपी विधानसभा चुनाव करीब आने के साथ ही भाजपा की नजर पंचायत प्रतिनिधियों पर है। पार्टी सम्मान के जरिये जहां इनके दिल में उतरनेे की कोशिश कर रही है वहीं सरकार ग्राम पंचायतों को पुरस्कृत कर प्रधानों को अपने पाले में करने के प्रयास में जुटी है। बीजेपी को उम्मीद है कि उसका यह प्रयास रंग लाएगा और वह विपक्ष द्वारा दिये जा रहे झटकों से उबरने में कामियाब हो जाएगी। कारण कि पिछलेे कुछ दिनोें में बीजेपी से अदर दलित का मोह भंग होता दिखा है। कई भाजपा नेता कांग्रेस का दामन थाम चुके है। वहीं सपा लगातार बसपा को तोड़ रही है। ऐसे में बीजेपी की चुनौती काफी बढ़ गयी है।

बता दें कि विधानसभा चुनाव में मात्र सात से आठ महीनेे बचे हैं। बिना पूर्वांचल जीते किसी के लिए भी सरकार बनाना मुश्किल है। पूर्वांचल में प्रयागराज के बाद सर्वाधिक 10 सीटेें आजमगढ़ में है। यहां सपा-बसपा का हमेशा से वर्चश्व रहा है। वर्तमान में पांच सीट पर सपा और चार पर बसपा का कब्जा है। सिर्फ एक सीट बीजेपी के पास है। विपक्ष 14 अगस्त 2020 को दलित प्रधान सत्यमेव जयते ही हत्या के बाद से ही लगातार दलित उत्पीड़न के मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है। जनवरी 2021 में जीयनपुर के पलिया गांव के दलित प्रधान के घर पुलिस द्वारा की गयी तोड़फोेड़ के बाद इस जिले को दलित सियासत का केंद्र बनाने की पूरी कोशिश की जा रही है।

अदर दलित भाजपा का बड़ा वोट बैंक माना जाता है लेकिन पलिया की घटना के बाद इनके बीच भी भाजपा के प्रति नाराजगी बढ़ी है। यही वजह है कि पासी समाज से आने वाले कई भाजपा नेता हाल में पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। इसे भाजपा के लिए झटके के रूप में देखा जा रहा है। अब पार्टी डैमेज कंट्रोल में जुटी है। वहीं दूसरी तरफ पार्टी द्वारा गांव में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए नेता और कार्यकर्ताओें की फौज को मैदान में उतार दिया है।

पार्टी ब्लाक स्तर पर समारोह आयोजित कर नव निर्वाचित ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य व जिला पंचायत सदस्यों को सम्मानित कर रही है। इसके पीछे पार्टी की मंशा अधिक से अधिक प्रतिनिधियों को संगठन से जोड़ना है। पूर्व में गुरु पूर्णिमा के दिन पार्टी ने मंदिर मठों में दस्तक दिया था। पार्टी के क्षेत्रीय महामंत्री कहते हैं कि भाजपा का हमेशा से मानना रहा है कि गांव के विकास से ही देश का विकास संभव है। केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार गांव को केंद्र में रखकर ही योजनाओं का संचालन कर रही है। हम राजनीति नहीं कर रहे बल्कि नव निर्वाचित लोगों को प्रोत्साहित कर रहे हैं कि वे योजनाओं का लाभ उठाएं और गांव के अंतिम छोर तक विकास को पहुंचाएं। हर पार्टी का लक्ष्य होता है अधिक से अधिक लोगों को जोड़ना। यह काम भाजपा भी कर रही है।

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