बाहुबली दुर्गा ने पल्हनी में कायम रखा वर्चश्व, अपनेे सबसेे करीबी को प्रमुख नहीं बना पाए रमाकांत

बेटे को बड़े अंतर से जिला पचायत अध्यक्ष बनाने वाले बाहुबली दुर्गा प्रसाद यादव ने जहां ब्लाक प्रमुख चुनाव में अपने भतीजे के सिर ताज बांध दिया वहीं रमाकांत यादव अपने गढ़ में खुद के सबसे करीबी को चुनाव नहीं जिता पाए। रमाकांत के करीबी सपा प्रत्याशी सर्वेश जायसवाल को करारी हार का सामना करना पड़ा। चर्चा तो यहां तक है कि अगर बीजेपी रमाकांत यादव के पुत्र वधू अर्चना के खिलाफ प्रत्याशी उतार देती तो हालात क्या होते।

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में बेटे को बड़ी जीत दिलाने वाले सपा के बाहुबली दुर्गा प्रसाद यादव ब्लाक प्रमुख चुनाव में भतीजे के सिर जीत का सेहरा बांध क्षेत्र में अपना वर्चश्व कायम रखने में सफल रहे लेकिन बाहुबली पूर्व सांसद रमाकांत यादव अपने सबसे करीबी को जीत के करीब भी नहीं पहुंचा पाए। वैसे रमाकांत के भाई की पुत्रवधू चुनाव जीतने में जरूर सफल रही लेकिन उसमें रमाकांत का कोई योगदान नहीं है। बीजेपी ने अर्चना यादव के खिलाफ प्रत्याशी न उतार उन्हें वाकओवर दे दिया था। रमाकांत के करीबियों की हार क्षेत्र में उनके घटते वर्चश्व से जोड़कर देखा जा रहा है।

बता दें कि फूूलपुर पवई विधानसभा रमाकांत यादव का गृहक्षेत्र है। इस विधानसभा की सभी ब्लाक प्रमुख सीटों पर हमेंशा से सपा का वर्चश्व रहा है। अहरौला ब्लाक में 20 साल तक सपा ने लगातार राज किया। वर्ष 2018 में भाजपा विधायक अरुणकांत यादव ने अविश्वास प्रस्ताव के जरिये यह सीट सपा से छीनी थी। इस चुनाव में सपा की आशा देवी को मात्र सात वोट मिले। जबकि निर्दल शाहीन खातून ने बड़ी जीत हासिल की।

पवई में भी सपा की करारी हार हुई। यहां विधायक अरुणकांत यादव अपने भाई वरुणकांत को भाजपा के टिकट पर चुनाव जिताने में सफल रहे। यहां भी सपा की जमानत जब्त हो गयी। वहीं दीदारगंज विधानसभा की मार्टीनगंज ब्लाक प्रमुख सीट को रमाकांत यादव के वर्चश्व से जोड़कर देखा जा रहा था। कारण कि पिछली बार उन्होंने मनोज सिंह को ब्लाक प्रमुख बनने में काफी मदद की थी। मनोज की जीत को रमाकांत की जीत से जोड़कर देखा गया था।

लेकिन दीदारगंज में चार साल के भीतर रमाकांत यादव को दूसरी बार बड़ी हार झेलनी पड़ी है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में जब भाजपा ने रमाकांत यादव के भाई लल्लन यादव की पुत्रवधू को विधानसभा का टिकट नहीं दिखा तो उन्होंने अर्चना को निर्दल मैदान में उतारा था। चुनाव में अर्चना की जमानत जब्त हो गयी थी। उन्हेें सिर्फ पांच हजार वोट मिले थेे। ब्लाक प्रमुख चुनाव में सपा ने शिवओम यादव को मार्टीनगंज ब्लाक से प्रत्याशी बनवाया था लेकिन रमाकांत के विरोध के बाद उनके सबसे करीबी सर्वेश जायसवाल सोनू को टिकट दिया गया।

इसके बाद यह सीट सपाई भी रमाकांत यादव से जोड़कर देख रहे थे। लेकिन 97 सदस्यों वाली क्षेत्र पंचायत में सपा प्रत्याशी सोनू जायसवाल को मात्र 33 वोट मिले। भाजपा प्रत्याशी यशवंत शर्मा 61 मत हासिल कर ब्लाक प्रमुख बने। वहीं सपा के बागी शिवओम यादव का मात्र 3 वोट मिला। सोनू की हार को रमाकांत की हार से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं दूूसरी तरफ जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव की बेहतर रणनीति का ही नतीजा था कि उनके पुत्र 84 में से 79 मत प्राप्त कर ऐतिहासिक जीत हासिल करने में सफल रहे थे। भाजपा प्रत्याशी संजय निषाद को मात्र पांच वोट मिला था। जबकि बीजेपी के 11 सदस्य चुनाव जीतकर आये थेे। दुर्गा ब्लाक प्रमुख चुनाव में भी अपने भतीजे प्रमोद को बड़े अंतर से जिताने में सफल रहे।

BY Ran vijay singh

रफतउद्दीन फरीद
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