बाहुबली पिता के विरोधी खेमें में होने के बाद भी भाजपा विधायक ने खुद को किया साबित, भाई को दिला दी प्रमुख की कुर्सी

बाहुबली रमाकांत यादव और उनके पुत्र भाजपा विधायक अरुणकांत के बीच मतभेद किसी से छिपे नहीं हैं। अरुण ने पिछले दिनों अपनी मां का नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ाया तो रमाकांत यादव ने साथ नहीं दिया और वे चुनाव हार गयी। इस बार ब्लाक प्रमुख चुनाव में अरुण कांत ने अपनी ताकत का एहसास कराया। अंदरखाने से रमाकांत द्वारा सपा के सपोर्ट के बाद भी अरुण अपने भाई वरुणकांत को पवई ब्लाक में एकतरफा जीत दिलाने में सफल रहे।

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. ब्लाक प्रमुख चुनाव में जहां कई दिग्गज अपनी कुर्सी नहीं बचा पाए वहीं बाहुबली रमाकांत यादव के पुत्र भाजपा विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र में वर्चश्व कायम रखा है। वैसेे विधायक अरुणकांत को भी इस चुनाव में एक झटका लगा। कभी उनके दम पर अहरौला ब्लाक की सत्ता हासिल करने वाली सुनीता राज अपनी जमानत तक नहीं बचा पाई। पवई में अरुण के भाई वरुण की जीत को इसलिए बड़ी आंका जा रहा है क्योंकि उनके पिता रमाकांत यादव चुनाव में सपा के साथ खड़े थे।

बता दें कि ब्लाक प्रमुख चुनाव का परिणाम जिले में अप्रत्याशित रहा है। लोग सपा पर दाव लगा रहे थे लेकिन 22 में से 12 सीट भाजपा के खाते में चली गयी। सपा को मात्र चार सीटें मिली। बाकी की सात सीट पर निर्दलों को सफलता मिली। सपा की चार सीटों की जीत में भी बीजेपी का योगदान रहा। कारण कि बीजेपी ने फूलपुर व लालगंज में प्रत्याशी नहीं उतारा था। दोनों जगह सपा प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हुए।

जिले में सर्वाधिक चर्चा में पवई क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष सीट थी। कारण कि यहां सपा ने अर्जुन यादव को मैदान में उतारा था तो भाजपा ने सपा के बाहुबली पूर्व सांसद के पूर्व सांसद रमाकांत यादव के छोटे पुत्र वरुणकांत यादव पर दाव लगाया था। सबकी नजर इस सीट पर इसलिए थी कि रमाकांत यादव समय सपा में हैं और पार्टी ने उन्हें फूलपुर का प्रभारी बनाया था। दूसरी खास वजह यह थी कि वर्ष 2017 के नगर निकाय चुनाव में रमाकांत की पहली पत्नी सत्यभामा जो विधायक अरुणकांत की मां है माहुल से भाजपा के टिकट पर नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ी थी। भाजपा में रहने के बाद भी रमाकांत ने उनका साथ नहीं दिखा था और वे चुनाव हार गयी थी।

इसके बाद पिता पुत्र के बीच दूरी बढ़ गयी और वर्ष 2018 में अरुणकांत ने अविश्वास प्रस्ताव के जरिये अहरौला ब्लाक प्रमुख राजेश्वर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर अपने करीबी सुनीता को ब्लाक प्रमुख बना दिया था। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से टिकट न मिलने के बाद रमाकांत यादव पहले कांग्रेस फिर सपा में शामिल हुए लेकिन अरुणकांत बीजेपी में बने रहे। अरुण को डिप्टी सीएम केशव का बेहद करीबी माना जाता है।

2021 के ब्लाक प्रमुख चुनाव में जब अरुणकांत ने अपने छोटे भाई वरुणकांत कोे पवई से भाजपा के टिकट पर मैदान में उतारा तो उनकी राह आसान नहीं मानी जा रही थी। कारण कि रमाकांत यादव सपा के साथ थे। चुनाव के दौरान बवाल भी हुआ लेकिन अरुणकांत अपने भाई को बड़े अंतर से जीत दिलाने में सफल रहे। सपा प्रत्याशी की जमानत तक नहीं बची। इसे क्षेत्र में अरुण के बढ़ते प्रभाव के रुप में देखा जा रहा है।

BY Ran vijay singh

रफतउद्दीन फरीद
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