अब आजमगढ़ में बगावती स्वर, स्वामी का जाना भारी पड़ा बसपा पर

अब आजमगढ़ में बगावती स्वर, स्वामी का जाना भारी पड़ा बसपा पर
swami prasad maurya

अति पिछड़ा मत खिसकने से चुनाव में बढ़ेगी बसपा की मुसीबत, मऊ में उठ चुका है बगावत का स्वर, आजमगढ़ में भी दिख रहा है गुस्सा

आजमगढ़. बसपा के एक के बाद एक कर कद्दावर नेताओं के साथ छोड़ने से पार्टी का मिशन 2017 खटाई में पड़ता दिख रहा है। खासतौर पर जोनल कोआर्डीनेटर जुगल किशोर व राष्ट्रीय महासचिव व नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य के पार्टी छोड़ने से पार्टी पूर्वांचल में कमजोर होती दिख रही है। 

स्वामी के पार्टी छोड़ने के तत्काल बाद जहां मऊ में बगावती तेवर सामने आये वहीं आजमगढ़ में उनके समर्थकों में गुस्सा दिख रहा है। निश्चित तौर पर मौर्य समर्थक उसी दल का दामन थामेंगे जहां स्वामी जायेगे। अगर सपा स्वामी को साथ लाने में सफल होती है तो निश्चित तौर पर वह मजबूत होगी साथ ही उसे केशव प्रसाद मौर्य की काट भी मिल जायेगी। 


बता दें कि पूर्वांचल में जोनल कोआर्डीनेटर के रूप में जुगुल किशोर ने लंबे समय तक काम किया था। जब वे पार्टी से बाहर हुए और भाजपा मे शामिल हुए तो भाजपा ने इसका भरपूर फायदा उठाया। उसे दलित मतों में पैठ बनाने में मदद मिली। अब स्वामी प्रसाद ने बसपा को बाय कह दिया है। स्वामी को बसपा के कद्दावर नेताओं में गिना जाता था। 

पिछड़े वर्ग खासतौर पर मौर्य समाज में उनकी गहरी पैठ थी। आजमगढ़ मंडल व आसपास के जिलों में बड़ी संख्या में मौर्य जाति को लोगों का भाजपा से मोहभंग होने और बसपा के साथ खड़ा होने के पीछे स्वामी प्रसाद मौर्य ही थी। भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर अपने खिसके जनाधार को वापस लाने का प्रयास किया था। 

वह काफी हद तक कामियाब भी थी। अब स्वामी ने बसपा का साथ छोड़ दिया है। ऐसे में उनके सर्मथक भी बसपा को बाय-बाय कहने के लिए तैयार है। कौमी एकता दल के विलय के बाद जहां पूर्वाचल में सपा मजबूत होती दिख रही रही है वहीं स्वामी के निकलने से बसपा का कमजोर होना तय है। इसे बसपा की 2017 में सत्ता में वापसी की उम्मीदों को झटका भी माना जा रहा है। 

वैसे संसय अभी इस बात का है कि स्वामी प्रसाद जायेगे किसके साथ। जुगुल किशोर की तरह वह भी भगवा के साथ खड़ होंगे या मुलायम सिंह यादव से पुरानी दोस्ती निभायेंगे। दोनों ने दल नफा नुकसान को देखते हुए स्वामी के लिए बांह पसारे दिख रहे है। रहा सवाल स्वामी समर्थकों का तो वे इसी उनके अगले कदम की प्रतीक्षा में है।

 स्वामी के कद की अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि उनके पार्टी छोड़ते ही, मऊ में उनके समर्थक बसपा के विरोध में उतर आये। जिला उपाध्यक्ष राघेश्याम मौर्य ने न केवल बगावती तेवर दिखाया बल्कि यह दावा भी किया कि उनके साथ सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने बसपा का दामन छोड़ दिया है। आजमगढ़ में किसी ने पार्टी भले ही न छोड़ी हो लेकिन कार्यकर्ताओं में आक्रोश साफ दिख रहा है। वहीं सपा और भाजपा इस बगावत को अपने लिए फायदेमंद मान रही है। 
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