आजमगढ़ की इस सीट पर इतिहास बनाने से चूक गई समाजवादी पार्टी

अमर व नरेंद्र का कद न आया भाजपा के काम, तीसरे पर खिसकी साइकिल। बसपा ने कायम रखा दबदबा।

आजमगढ़. जिले की हाई प्रोफाइल सीट थी लालगंज। आजादी के बाद पहली बार वर्ष 2012 के चुनाव में पहली बार इसे सुरक्षित किया गया और पहले ही चुनाव में सपा ने यहां बाजी मारी। इस सीट पर सपा ने पहली बार खाता खोला था लेकिन अखिलेश और डिपंल की सभा, और भाभी द्वारा मुंहदिखाई मागने का भी असर यहां के लोगों पर नहीं हुआ। एक‍ बार फिर यहां लोगों ने हाथी दौड़ा दिया। यहां भाजपा के नरेंद्र सिंह और सपा से निष्‍काशित अमर सिंह का प्रभाव भी भाजपा के काम नहीं आया।



बता दें कि उक्त सीट 1952 से 2007 तक सामान्य रही। वर्ष 2007 में परिसिमन के बाद सुरक्षित कर दिया गया था। इसके बाद यहां से सवर्ण और पिछड़ों का दबदबा समाप्‍त हो गया। अस्तित्‍व में आने के बाद पहली बार सपा यहां वर्ष 2012 में जीतने में सफल रहे थे।



वर्ष 2017 के चुनाव में यह माना जा रहा था कि सपा मजबूती से लड़ेगी। कारण कि बसपा से यहां विल्‍कुल नया चेहरा अरिमर्दन आजाद मैदान में थे। जबकि सपा ने अपने विधायक बेचई सरोज पर दाव खेला था। वहीं भाजपा ने सपा के पूर्व सांसद पर दाव लगाया जिनका क्षेत्र में बड़ा विरोध था लेकिन माना जा रहा था कि मोदी लहर और अमर सिंह का सपा से निष्‍काशन के बाद बढ़े गुस्‍से का लाभ इन्‍हें लाभ मिलेगा।



पर यहां फिर बसपा ने जीत हासिल की। राजनीति में नये होने के बाद भी अरिमर्दन ने राजनीति के मझे खिलाडी दरोगा सरोज को सवा दो हजार मतों से मात दी। रहा सवाल सपा का तो वह तीसरी स्‍थान पर पहुंच गयी।
 
कब किसके सिर सजा ताज

2017 अरिमर्दन आजाद बसपा 
2012 बेचई सरोज सपा
2007 सुखदेव राजभर बसपा
2002 सुखदेव राजभर  बसपा
1996 नरेंद्र सिंह भाजपा
1993 सुखदेव राजभर बसपा
1991 सुखदेव राजभर  बसपा
1987 ज्ञानू सिंह जनता दल
1982 रविन्द्र राय कांग्रेस
1980 त्रिवेणी राय कांग्रेस
1977 ईशदत्त यादव जनता दल
1972 त्रिवेणी राय कांग्रेस
1967 त्रिवेणी राय कांग्रेस
1962 सत्यदेव सिंह प्रसोपा
1957 तेज बहादुर सिंह कम्युनिस्ट
1952 कालिका सिंह कांग्रेस
BJP
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रफतउद्दीन फरीद Desk/Reporting
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