‘का लेके शिव के मनाइब हो, शिव मानत नाहीं...

‘का लेके शिव के मनाइब हो, शिव मानत नाहीं...

Sunil Yadav | Publish: Feb, 15 2018 07:12:55 PM (IST) Azamgarh, Uttar Pradesh, India

शिव महोत्सव व श्रृंगार उत्सव में कलाकारों ने बांधी शमा

आजमगढ़. महाशिवरात्रि के अवसर पर बुधवार की शाम बाबा भंवरनाथ मंदिर के प्रांगण में ‘बाबा भंवरनाथ शिव महोत्सव एवं श्रृंगार उत्सव’ आयोजित हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ ब्लू नाईट आर्केस्टा एण्ड जागरण गु्रप के गायक राजेश रंजन ने अपनी टीम के साथ बाबा का जलाभिषेक कर किया। आरती व गणेश वंदना के बाद ‘बम-बम बोल रहा है काशी‘ गाकर शमां बांध दिया।


मुम्बई से आये गायक प्रशान्त सिंह ने आज के दौर में प्रचलित भोजपुरी गीतों की अश्लीलता पर जबरदस्त कटाक्ष किया। उन्होंने ‘का लेके शिव के मंगई बे, शिवमानत नाहीं‘, ‘जिया हो आजमगढ़ के लाल‘ गीत गाकर पूरा माहौल भक्तिमय कर दिया। इस अवसर पर बाल रूप में भगवान भोलेनाथ की जीवंत झांकी ने भक्तों का मन मोह लिया। वहीं दिल्ली से आये सोनू भाई के साथ संजय अन्नू, खुशी, पलक, ममता, शालू ने भी शिवजी के बारात का आनन्द लेकर झूमने को मजबूर कर दिया। शिवरात्रि ? की संध्या पर बाबा भंवरनाथ का दिव्य श्रृंगार सभी शिवभक्तों ने निहाल कर दिया। इसके बाद लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर के संरक्षक विपिन कुमार सिंह डब्बू, जय प्रकाश दूबे, आरपी मिश्रा, अनिल सिंह, मंटू सिंह, इन्दल बाबा ने कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले कलाकार प्रभात सिंह, राजेश रंजन, रितेश राजा, विरेन्द्र भारती, लाडो मद्धेशिया, विजय प्यारे, अरूण अनारी, मनोज यादव, नीलू राय, गुडड् राय, शाह आलम सवारिया, विजेन्द्र गिरी, आरती गोसाई, चंदा सरगम आदि को अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया।

 

अकीदत के साथ मना मौलाना याकूब रहमतुल्ला का 114वां सालाना उर्स

आजमगढ़. नगर के मुहल्ला दलाल घाट पर स्थित हजरत मौलाना याकूब रहमतुल्ला अलैह का 114वां सालाना उर्से पाक गुरुवार को बड़े ही अकीदत व मोहब्बत के साथ मनाया गया। इस मौके पर सुबह कुआर्नख्वानी हुई। दोपहर 2 बजे से तकिया स्थित मुसाफिर खाने के पास से चादर व गागर निकाली गयी, जो कोट चैराहा, जालंधरी, टेढ़िया मस्जिद, बाज बहादुर, राजा का किला, कोट चैराहा होते हुए दलालघाट पहुंचकर मौलाना याकूब रहमतुल्ला की मजार पर चादर चढ़ाई गई। इसके बाद देर शाम तक कव्वाली, लंगर व जलसे का आयोजन हुआ। मोतवल्ली शकील अहमद ने बताया कि बाबा के मजार पर काफी दूर दराज सहित नगर के लोग अपनी मुरादे लेकर आते है और उनकी मूरादें पूरी होती है। इस मौके पर मोतवल्ली शकील अहमद, वसीम अहम उर्फ भट्टू आदि लोग मौजूद रहे।

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