आजमगढ से किया यह वादा पूरा नहीं कर सकी मोदी सरकार, 2019 में पड़ सकता है भारी

आजमगढ से किया यह वादा पूरा नहीं कर सकी मोदी सरकार, 2019 में पड़ सकता है भारी
आजमगढ से किया यह वादा पूरा नहीं कर सकी मोदी सरकार

Ashish Kumar Shukla | Publish: Feb, 07 2018 04:33:25 PM (IST) Azamgarh, Uttar Pradesh, India

लंबे समय से वाराणसी से लालगंज वाया आजमगढ़ होते हुए गोरखपुर के नई रेल लाइन बिछाने की मांग चल रही है

रण विजय सिंह की रिपोर्ट...

आजमगढ़. लोकसभा चुनाव में एक साल बाकी हैं। मिलेनियम वोटर अभियान के जरिये सत्ताधारी दल बीजेपी ने अपनी चुनाव तैयारियां शुरू कर दी हैं। विपक्ष भी चुनाव तैयारी में जुटा हुआ है लेकिन मोदी सरकार चार साल पहले किये गए वादे को भूल गयी। वहीं सरकार के रेल राज्यमंत्री भी इस क्षेत्र की खुलेआम उपेक्षा कर रहे है। यह उपेक्षा वर्ष 2019 में बीजेपी पर भारी पड़ सकती है।

बता दें कि लंबे समय से वाराणसी से लालगंज वाया आजमगढ़ होते हुए गोरखपुर के नई रेल लाइन बिछाने की मांग चल रही है। वर्ष 1973 में इसके लिए सर्वे भी कराया गया था लेकिन यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। वर्ष 2014 के चुनाव के समय बीजेपी ने इसका वादा किया। आजादी के बाद पहली बार वर्ष 2014 में लालगंज लोकसभा सीट जीतने में बीजेपी सफल रही।

सांसद नीलम सोनकर ने प्रस्ताव देकर सरकार को वादा याद भी दिलाया लेकिन आजतक इस पर काम नहीं शुरू हुआ। इसी तरह छपरा से शाहगंज तक रेलवे लाइन दोहरीकरण का काम भी अधर में लटका है। इस संबंध में कई बार ज्ञापन सौंपे गये। सदन में भी मामला उठा लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी।

जबकि रेल राज्यमंत्री मनोज सिंन्हा आजमगढ़ से सटे गाजीपुर के रहने वाले है। पिछले चार साल में यहां रेलवे के विकास के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। जबकि गाजीपुर से कटरा तक के लिए ट्रेन चला दी गयी। अहम बात है लालगंज को पूर्व में बसपा सरकार ने जिला बनाने का प्रयास भी किया था लेकिन यह कस्बा रेल तो दूर रोडवेज तक नहीं है। इससे लोगों में खासी नाराजगी दिख रही है। मुलायम सिंह यादव के आजमगढ़ से चुनाव न लड़ने की घोषणा करने के बाद बीजेपी की राह काफी हद तक यहां आसान दिख रही है लेकिन सरकार के प्रति नाराजगी उस पर भारी पड़ सकती है।

सामाजिक कार्यकर्ता एसके सत्येन, मुहम्मद अफजल, व्यवसायी ओम प्रकाश अग्रवाल, देवेश जायसवाल कहते हैं कि यातायात के मामले में आजमगढ़ आज भी काफी पिछड़ा है। पिछले पांच साल में आजमगढ़ को एक भी नई ट्रेन नहीं मिली है। अगर छपरा से शाहगंज तक दोहरीकरण का काम हुआ होता तो ट्रेनों की लेट लतीफी से छुटकारा मिल जाता लेकिन यह काम भी नहीं हुआ। आज गोरखपुर और वाराणसी के लिए कोई सीधी ट्रेन नहीं है। यदि सरकार वादा पूरा करती और ट्रैक बिछाने का काम होता तो यह जिला सीधे महानगरों ने जुड़ जाता।

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