अनाथ बच्चे की दोनों किडनी खराब, पैसे के अभाव में नहीं हो रहा इलाज

बच्चा जिंदगी और मौत से जूझ रहा है और परिवार के लोग चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे है।

आजमगढ़. आठ साल का एक बच्चा जिसने अभी ठीक से ककहरा भी नहीं सीखा है उसके जीवन पर ही संकट खड़ा हो गया है। इस बच्चे की दोनों किडनी खराब है। बीमार बच्चे के पिता और बाबा भी अब इस दुनियां में नहीं है। परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है लेकिन इस परिवार को सरकार की भी आर्थिक मदद नहीं मिल रही है। कारण कि इनके पास आयुष्मान योजना का कार्ड नहीं है। बच्चा जिंदगी और मौत से जूझ रहा है और परिवार के लोग चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहे है।

मामला सिधारी थाना क्षेत्र के मतौलीपुर गांव का है। इस गांव के रहने वाले दीपक कुमार राय और उनके पिता चंद्रभान राय की पूर्व में मौत हो चुकी है। दीपक के आठ वर्षीय पुत्र अंश की दोनों किडनी खराब है। परिवार के लोगों ने तबीयत बिगड़ने पर पिछले दिनों जिला अस्पताल के आइसीयू में भर्ती कराया तो पता चला कि उसके शरीर में मात्र तीन प्वाइंट खून बचा है। संयोग से अपनी बेटी को लेकर उसी वार्ड में मौजूद सामाजिक कार्यकर्ता रामकुंवर यादव भी थे और इस बात की जानकारी के बाद उन्होंने प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक एसकेजी सिंह से मुफ्त में ब्लड दिलाने का आग्रह किया। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक ने विवशता को महसूस किया और ब्लड बैंक से निशुल्क ब्लड की व्यवस्था कराई। इससे बच्चे की सांसे चल रही हैं। परिवार के मुताबिक बच्चे के पिता और बाबा की मौत के कारण पूरा परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। उनके पास इतना धन नहीं है कि बच्चे को किसी बड़े अस्पताल में दिखा सकें।


अंश की मौसी उसे अपनी किडनी देने के लिए तैयार है लेकिन किडनी ट्रांसप्लांट कराने के लिए लाखों रूपये की जरूरत है जो परिवार के पास नहीं है। इस परिवार के पास मात्र ढाई बीघा खेत है जिसमें फसल का उत्पादन कर किसी तरह दो वक्त की रोटी का जुगाड़ लोग कर रहे हैं। अब बच्चे के लिए दवा कहां से लाए। परिजनों के मुताबिक उन्होंने किसी तरह 80 हजार रुपये की व्यवस्था कर जांच पूरी करायी लेकिन अब आपरेशन कराने के लिए उनके पास धन नहीं है। बस वही खेत है जिसे वे बेचकर कुछ धन का जुगाड़ कर सकते हैं लेकिन खेत बेचने के बाद पूरा परिवार भूखों मर जाएगा।


रामकुंवर यादव का कहना है कि यदि सरकार आयुष्मान योजना का लाभ इस परिवार को देती तो उसकी जिंदगी बचायी जा सकती है। इसके अलावा उन्होंने आम लोगों से भी आगे आने की अपील की। बता दें कि राम कुंवर पहले भी कैंसर से पीड़ित एक बच्चे को जन सहयोग से नया जीवन दे चुके है। उनके आगे आने के बाद परिवार की उम्मीद बढ़ी है लेकिन सवाल यह है कि अगर प्रशासन की नजर में यह गरीब परिवार आयुष्मान का पात्र नहीं है तो सरकार और अधिकारी किसे इस योजना का लाभ देंगे।

sarveshwari Mishra Desk/Reporting
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