वाराणसी तक के अस्पतालों का काटा चक्कर नहीं मिली आक्सीजन, मरीज की मौत

-सरकारी तो दूर निजी अस्पतालों में भी दिख रहा आक्सीजन का आभाव

-मेडिकल कालेज व वाराणसी में मरीज को भर्ती करने से भी कर दिये इनकार

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. कोरोना संक्रमण काल में सरकार आक्सीजन की उपलब्धता को लेकर लाख दावे करे लेकिन हकीकत कुछ और ही है। जिले में एक मरीज के परिवार के लोग आक्सीजन के लिए जिले के सरकारी व निजी अस्पताल ही नहीं बल्कि वाराणसी तक भटके लेकिन उन्हें आक्सीजन नहीं मिली। सड़क पर घूमते घूमते मरीज ने दम तोड़ दिया। आक्सीजन की कमी से मरीज की मौत के कारण जहां लोगों में भारी गुस्सा है वहीं इसे सरकार की नाकामी के तौर पर देखा जा रहा है।

लालगंज नगर पंचायत निवासी 70 वर्षीय व्यवसायी अरुण कुमार की तबीयत 18 अप्रैल की शाम बिगड़ गई। परिवार के लोग उन्हें कस्बे के एक प्राइवेट अस्पताल में दिखाया। वहां जांच के बाद पता चला कि मरीज का आक्सीजन लेबल काफी कम है। चिकित्सक ने ऐसे अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी जहां आक्सीजन उपलब्ध हो। इसके बाद परिवार के लोग कई निजी अस्पातलों में गए लेकिन कहीं आक्सीजन नहीं मिली। एक निजी चिकित्सक ने अपने यहां कुछ देर तक आक्सीजन लगाया लेकिन उनके यहां भी आक्सीजन थोड़ी देर में समाप्त हो गयी। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की सलाह दी।

परिवार के लोग व्यवसायी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए तो चिकित्सक ने कोरोना की जांच के लिए जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया। इसके बाद लोग रात में ही उन्हें लेकर जिला चिकित्सालय पहुंचे जहां से उन्हें अतरौलिया के लिए रेफर कर दिया गया। स्वास्थ्य केंद्र अतरौलिया पहुंचने पर कोरोना की जांच हुई तो रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद परिवार के लोग उन्हों लेकिन राजकीय मेडिकल कालेज चक्रपानपुर पहुंचे।

व्यापारी के पुत्र अमित कुमार और आशीष कुमार ने आरोप लगाया कि मेडिकल कालेज में उन्हें यह कहकर भर्ती करने से मना कर दिया गया कि यहां सिर्फ कोरोना के मरीज भर्ती किए जाते हैं। इसी भागदौड़ में सुबह हो गई। 19 अप्रैल की सुबह उन्हें जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। वहां चिकित्सक ने कहा कि आक्सीजन की आवश्यकता है। जहां आक्सीजन उपलब्ध हो वहां ले जाइए। जिले में कई नर्सिंग होम ने आक्सीजन के सवाल पर हाथ खड़े कर दिये। इसके बाद उन्हें वाराणसी ले जाया गया। वाराणसी में किसी अस्पताल ने व्यवसायी को भर्ती ही नहीं लिया। इसी भागदौड़ में व्यवसायी की मौत हो गयी।

BY Ran vijay singh

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रफतउद्दीन फरीद
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