गरीब दलित की शादी के लिए खुले मंदिर के दरवाजे, वैदिक मंत्रों के बीच हुए सात फेरे

गरीब दलित की शादी के लिए खुले मंदिर के दरवाजे, वैदिक मंत्रों के बीच हुए सात फेरे

Mohd Rafatuddin Faridi | Publish: Sep, 02 2018 10:53:16 PM (IST) Azamgarh, Uttar Pradesh, India

लोगों ने मौके पर पहुंचकर वर वधू को दिया आर्शीवाद, उपहार भी भेंट किये

आजमगढ़. श्री गौरी शंकर मंदिर ट्रस्ट ने रविवार को एक पेश की मिसाल। एक तरफ जहां जात पात, ऊंच नीच के नाम पर दलितों को मंदिर की सीढ़िया नहीं चढ़ने दी जाती वहीं इस ट्रस्ट ने गरीब दलित की शादी के लिए न केवल मंदिर का दरवाजा खोल दिया बल्कि शादी का खर्च भी ट्रस्ट द्वारा उठाया गया। जानकारी होने पर आसपास के लोग भी वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल हुए और वर वधू का आर्शीवाद देने के साथ ही उपहार भी भेंट किया।

 

फरिहा थाना क्षेत्र के परसहां गांव निवासी करिश्मा के पिता शिवशंकर राम की काफी पहले मौत हो चुकी थी। करिश्मा का पालन पोषण उसकी मां ने किसी तरह मेहनत मजदूरी कर की। उसके पास इतना पैसा नहीं था कि वह अपनी बेटी का हाथ पीला कर सके। करीब 20 दिन पूर्व वह एक समाजसेवी से बेटी की शादी में आ रही दिक्कत के बारे में वार्ता कर रही थी। इसी दौरान पूरे मामले की जानकारी श्री गौरी शंकर मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी बाबू पुच्चा सिंह व कुसुमलता सिंह को हुई। उन्होंने तत्काल करिश्मा के विवाह का निर्णय लिया और उसकी मां से कहा कि वह शादी तय करे।

 

करिश्मा की शादी बद्दोपुर निवासी राजू गौतम के साथ तय हुई। शनिवार की शाम मंदिर परिसर में बारात पहुंची और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह संपन्न कराया गया। आसपास के लोगे भी वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल हुए और वर वधू को आर्शीवाद देने के साथ ही उपहार भेंट किया। ट्रस्ट द्वारा नव दंपति को गृहस्ती का आवश्यक सभी सामान उपहार स्वरूप दिया गया।

 

बाबू पुच्चा सिंह ने कहा कि श्री गौरीशंकर ट्रस्ट का उद्देश्य ही जरूरतमंदों की मदद करना है। विवाह से बेहतर नेक कार्य को दूसरा हो ही नहीं सकता। ट्रस्ट आगे भी ऐसे सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर सहयोग करेगा। इस तरीके के असहाय लोगों की जानकारी दें ताकि ट्रस्ट उनकी सेवा और मदद कर सके। आगामी समय में ट्रस्ट द्वारा सामूहिक विवाह कराया जाएगा। ताकि ज्यादा से ज्यादा गरीब कन्याओं का विवाह हो सके।

By Ran Vijay Singh

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