आजमगढ़ में टूटा दाम महुला रिंग बांध, 500 से अधिक घर पानी में डूबे

आजमगढ़ में टूटा दाम महुला रिंग बांध, 500 से अधिक घर पानी में डूबे

Jyoti Mini | Publish: Aug, 19 2017 03:16:42 PM (IST) | Updated: Aug, 19 2017 03:24:56 PM (IST) Azamgarh, Uttar Pradesh, India

पांच दिन से था रिसाव लेकिन प्रशासन नही हुआ गंभीर, ग्रामीण जुटे थे बांध बचाने में

आजमगढ़. सगड़ी तहसील क्षेत्र के दियारा में घाघरा के कहर के बीच प्रशासन की लापरवाही से 500 से अधिक परिवार के लोग आफत में फंस गये हैं। कारण कि यहां दाम महुला रिंग बांध शुक्रवार की रात टूट गया। गृह सचिव के दौरे के दौरान बांध टूटने से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है। ग्रामीणों ने गांव छोड़ प्राथमिक विद्यालय में शरण ली है। गृह सचिव इस समय जीयनपुर कोतवाली का निरीक्षण कर रहे है। यहां से बंधा काफी करीब है। ऐेसे में माना जा रहा है कि वे मौके पर जा सकते है। वहीं बांध टूटने से नाराज ग्रामीणों ने महुला गढवल बांध पर जाम लगाने का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने उन्‍हें भगा दिया।   

 

 

 

बता दें कि, सगड़ी तहसील क्षेत्र के दियारा क्षेत्र में बाढ़ के चलते तीन दर्जन से अधिक गांव घाघरा की बाढ़ के चपेट में है। यहां बाढ़ से राहत को लेकर किये गए इंतजाम से स्‍थानीय लोग काफी नाखुस है। खुद भाजपा नेता व्‍यवस्‍था पर सवाल उठाते रहे है। इसके बाद भी प्रशासन ने व्‍यवस्‍था में किसी तरह का सुधार नहीं किया।

 

रहा सवाल दाम महुला रिंग बांध की तो यहां पिछले पांच दिनों से रिसाव हो रहा था। ग्रामीणों ने बाढ़ खंड के अधिकारियों से लेकर डीएम तक से शिकायत की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीण खुद रिसाव बंद करने का प्रयास करते रहे लेकिन असफल रहे। शुक्रवार की रात करीब 10.30 बजे बांध पानी का दबाव नहीं झेल सका और टूट गया। बांध टूटने से दाम महुला गांव के करीब 500 घर डूब गये। चारो तरफ हाहाकार बचा हुआ है। गांव के लोग रात में ही गांव छोड़कर पलायन कर गये लेकिन कोई प्रशासनिक अधिकारी कर्मचरी नहीं पहुंचा।

 

 

ग्रामीणों ने प्राथमिक विद्यालय में शरण ले रखी है। कुछ ग्रामीण इधर उधर अब भी भटक रहे है। दुर्व्‍यवस्‍था से नाराज ग्रामीणों ने शनिवार को महुला गढवल बांध पर जाम का प्रयास किया लेकिन पुलिस ने उन्‍हें जाम नहीं करने दिया। मामले की जानकारी होने पर भाजपा नेता मनीष मिश्रा मौके पर पहुंच गये हैं। उनहोंने आरोप लगाया कि पांच दिन से प्रशासन से शिकायत की जा रही थी। यदि प्रशासन एक लाख रूपये खर्च कर बांध की मरम्‍मत करा देता तो बंधा नहीं टूटता लेकिन प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा अब पांच सौ परिवारों को झेलना पड़ा रहा है।   

 

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